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संशय से परे है अडानी ग्रुप! इस दिग्गज वकील ने क्यों की ऐसी टिप्पणी? यहां जानें

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पोर्ट से लेकर एयरपोर्ट तक विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करने वाला अडानी समूह करीब 4 अध्ययनों के बाद भी हिंडनबर्ग की चेच रिपोर्ट के प्रभाव से दृश्य नहीं पाया गया है। अभी भी समूह की प्राधिकरण के शेयर रिपोर्ट से पहले के स्तर से गिरे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर हिंडनबर्ग के भ्रम के कारण समूह को सेबी की जांच का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी का कहना है कि अडानी ग्रुप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को गड़बड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है।

नहीं मिला गड़बड़ी का सबूत

उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग अदानी ग्रुप के ऊपर स्टॉक के भाव में हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बताए गए कमिटी को इस संबंध में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा, अडानी समूह संदेह से परे है। चाहे स्टॉक के भाव में हेराफेरी की बात हो या मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की या रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन एक्शन की, अडानी ग्रुप या ग्रुप की ऑब्जर्वेटरी द्वारा किसी प्रकार की गड़बड़ी करने का कोई सबूत नहीं मिला है।

सेबी की चेतावनी पूरा पालन

रोहतगी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के एम्ट्रेस्ट पैनल की रिपोर्ट में रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन को लेकर कोई उल्लंघन नहीं पाया गया है। पैनल ने पाया कि सेबी द्वारा न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता का जो पैमाना तैयार किया गया है, उसकी पूरी तरह से पालन किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात… पैनल ने पाया कि अडानी समूह के शेयरों का भाव स्थिर है। उनकी सेल भले ही उस स्तर पर नहीं है, जहां 24 जनवरी से पहले थे, लेकिन वे स्थिर हैं और विवशता के मन में गारंटी देते हैं। अदानी समूह ने गारंटी की गारंटी देने के लिए बहुत प्रयास किया है।

अभी भी नुकसान में अडानी के शेयर

आपको बता दें कि अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट 24 जनवरी सामने आई थी। रिपोर्ट में हिंडनबर्ग रिसर्च में अडानी ग्रुप के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिनमें स्टॉक के भाव में हेराफेरी भी शामिल है। उसके करीब एक महीने के दौरान अडानी समूह के ऑब्ज़ेट के प्रपत्र में 150 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की भारी-भरकम गिरावट आई थी और नुकसान से अब तक अडानी के शेयर का अधिकार नहीं पाया गया।

पैनल की ज़िम्मेदारी जांच में

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद अडानी से अभिशाप देश में राजनीतिक बहस का केंद्र टूट गया है। वर्तमान बाजार सेबी अडानी समूह के ऊपर हिंडनबर्ग अनुसंधान के आधार पर विभिन्न आरोपों की जांच कर रहा है और सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी निगरानी करने के लिए एक पैनल बनाया है। फेडरेशन पैनल में सुप्रीम कोर्ट के आरोपित जज जस्टिस एएम सप्रे, जस्टिस ओपी भट्ट, केवी कामथ, नंदन निलेकणि और सोमशेखर सुंदरेशन शामिल हैं।

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