Bareilly News: 33 करोड़ से बनाया नस्ल सुधार केंद्र, एक भी दिन नहीं चला
बरेली। सिस्टम की सुस्ती ने दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार करके दूध उत्पादन बढ़ाने की कवायद को पलीता लगा दिया। बहेड़ी के मुड़िया मुकर्रमपुर में 33 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2018 में बनाया गया पशु उत्थान वर्ण शंकर केंद्र बीते पांच साल में एक भी दिन नहीं चल सका। डॉक्टरों और चिकित्सा स्टाफ के आवासों के साथ प्रयोगशाला और क्लास रूम बनाए गए, ताकि प्रयोग हों और प्रशिक्षण देकर नई नस्लों को विकसित किया जा सके। मगर अति महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर लाने के लिए विशेषज्ञों और कर्मचारियों की तैनाती नहीं हो सकी।
पशुपालन विभाग से संबद्ध कर लिए गए उधार के स्टाफ से केंद्र की देखरेख हो रही है। केंद्र के संचालन के लिए संयुक्त निदेशक का पद स्वीकृत है पर तैनाती नहीं है। बहेड़ी के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दीपक कुमार के पास अतिरिक्त कार्यभार है। वह कभी कभी पहुंचते हैं। केंद्र का संचालन कब तक शुरू होगा, उन्हें भी नहीं पता है। इस बीच इमारत की हालत खस्ता हो रही है। प्लास्टर गिर रहा है। परिसर में घास बढ़ रही है। सफाई तक नियमित नहीं हो रही है।
निरीक्षण तक सीमित हैं अफसर
.जब जब केंद्र के सफेद हाथी बन जाने का मुद्दा उठता है, कोई न कोई अफसर केंद्र का निरीक्षण करने पहुंच जाता है। अप्रैल में जिले के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मेघ श्याम ने निरीक्षण कर जमीनी हकीकत से संबंधित रिपोर्ट विभागीय निदेशालय को भेजी थी, लेकिन अब तक इसके संचालन की कोई कार्ययोजना सामने नहीं आई। पशु पालकों को उन्नत नस्लों के विकसित होने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
पशुधन मंत्री का जनपद फिर भी इंतजार
आंवला विधानसभा क्षेत्र के विधायक और पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के जनपद में नस्ल सुधार के लिए बनाए गए केंद्र के संचालन का इंतजार हो रहा है। पशुपालन में सुधार के लिए किसान चर्चा करते हैं तो इसका जिक्र करना नहीं भूलते। पशु पालकों का कहना है कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र का संचालन जरूरी है।
कोट
अगर केंद्र चालू हो जाता तो नस्ल सुधार के लिए शोध को बढ़ावा मिलता। बछिया पैदा करने के लिए सीमन का निर्माण होने लगता। बरेली से कई जनपदों को सीमन की आपूर्ति की जाती। यह कब तक चालू होगा यह कह पाना संभव नहीं है।
डॉ. दीपक कुमार, संयुक्त निदेशक,पशु उत्थान वर्ण शंकर केंद्र


