Bareilly News: कार्ड टेस्ट पॉजिटिव डेंगू नहीं, बगैर एलाइजा जांच इलाज पर कार्रवाई
बरेली। मलेरिया और डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ते ही कुछ निजी अस्पताल वायरल बुखार के पीड़ित मरीजों से जांच के नाम पर कमाई करने में लग गए हैं। इनकी कारगुजारी पर अंकुश लगाने की तैयारी है। महज कार्ड टेस्ट की पॉजिटिव रिपोर्ट डेंगू बताकर इलाज करने की पुष्टि पर कड़ी कार्रवाई होगी।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, शहर स्थित कुछ निजी अस्पतालों में एनएस-1 कार्ड टेस्ट पॉजिटिव मिलने पर बुखार के मरीज को डेंगू बताकर इलाज शुरू करने की सूचना मिल रही है। डेंगू के इलाज का झांसा देकर मोटी रकम भी वसूले जाने की आशंका है। लिहाजा, निजी अस्पतालों और पैथालॉजी को स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा पत्र जारी किया है। रिपोर्ट को संदिग्ध मानते हुए एलाइजा जांच के निर्देश दिए हैं। कहा है कि एनएस-1 कार्ड टेस्ट स्वास्थ्य विभाग नहीं मानता। बगैर एलाइजा जांच के डेंगू बताकर इलाज करने पर कार्रवाई होगी।
प्रभारी सीएमओ डॉ. सुदेश कुमारी का कहना है कि एनएस-1 कार्ड टेस्ट की पॉजिटिव रिपोर्ट निगेटिव होने की संभावना होती है। कार्ड टेस्ट की संवेदनशीलता महज 60 फीसदी होती है। पॉजिटिव मिलने पर एलाइजा जांच जरूरी है। इसकी संवेदनशीलता 99 फीसदी होती है।
कार्ड टेस्ट की रिपोर्ट गलत होने की आशंका
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक एनएस-1 कार्ड की जांच में गलत रिपोर्ट आने की आशंका ज्यादा है। ज्यादातर केस में किट की गुणवत्ता में कमी होना तो कई बार संवेदनशीलता कम होना वजह होती है। कार्ड टेस्ट निगेटिव है तो रिपोर्ट निगेटिव ही होगी। पर पॉजिटिव रिपोर्ट मिलती है, तो वह किस बीमारी की होगी यह पता नहीं चलता। एलाइजा जांच से डेंगू की पुष्टि करीब सौ फीसदी होती है। कई निजी पैथोलॉजी में बुखार के मरीजों की जांच एनएस-1 कार्ड से हो रही है। जांच की फीस छह सौ रुपये वसूल रहे हैं। कार्ड जांच में करीब दस मिनट में रिपोर्ट मिलती है। एलाइजा जांच की फीस करीब एक हजार रुपये है। रिपोर्ट मिलने में करीब छह घंटे से ज्यादा लगता है।
एनएस-1 : डेंगू के संदिग्ध लक्षण दिखने पर शुरुआती जांच होती है। पॉजिटिव रिपोर्ट मिलने पर व्यक्ति बीमार है, इसकी पुष्टि होती है। पर डेंगू है यह संदेहास्पद होता है। यह जांच बुखार आने के तीन-चार दिन में करानी चाहिए। इसके बाद जांच रिपोर्ट निगेटिव मिलती है।
एलाइजा : डेंगू की पुष्टि की प्रमाणिकता एलाइजा जांच से होती है। यह बुखार आने के दस दिन तक सटीक परिणाम देने में सक्षम है। दस दिन के बाद जांच कराने पर एलाइजा की आईजीजी होती है। हालांकि, इससे परिणाम की सटीकता समय के आधार पर होती है।
केस-1 : सिटी स्टेशन के पास के रहने वाले विमल पटेल के 17 वर्षीय बेटे को चार दिन से बुखार था। एक निजी अस्पताल ने कार्ड टेस्ट के बाद रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव बताई। वह दवा लेकर लौट आए। फिर जिला अस्पताल पहुंचकर एलाइजा जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव रही। बुखार संंबंधी अन्य जांच में टाइफाइड की पुष्टि के बाद इलाज शुरू हुआ।
केस-2 : पुराना शहर के कामरान की पत्नी को सुबह-शाम तेज बुखार हो रहा था। पास की निजी क्लिनिक पहुंचे तो कार्ड टेस्ट रिपोर्ट संदिग्ध डेंगू पॉजिटिव बताकर किसी निजी अस्पताल में भर्ती होने काे कहा। आर्थिक अभाव के चलते वे अगले दिन तीन सौ बेड अस्पताल पहुंचे। एलाइजा जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव मिली। पत्नी वायरल से पीड़ित थीं।



