Bareilly News: निगम की बसें खड़ीं, खूब दौड़ रहीं अनुबंधित
बरेली। तकनीकी खराबी व परिचालकों की कमी की वजह से निगम की बसें वर्कशॉप से नहीं निकल रहीं, जबकि अनुबंधित बसें खूब दौड़ रही हैं। इससे जहां निगम को घाटा हो रहा है, वहीं निजी बस मालिक मलाई काट रहे हैं।
बरेली डिपो में 150 और रुहेलखंड डिपो में निगम की 130 बसें हैं। इसके अलावा दोनों डिपो में 40 अनुबंधित बसें भी हैं। बरेली और रुहेलखंड डिपो में रोजाना 40-45 बसें रूट पर नहीं जा पातीं। खराबी की वजह से कुछ तो वर्कशॉप से बाहर ही नहीं आतीं। जो बाहर आ जाती हैं, वह परिचालकों की कमी के चलते घंटों खड़ी रहती हैं। इसके बाद वापस वर्कशॉप लौट जाती हैं। तकनीकी खराबी या फिर परिचालकों की कमी का असर अनुबंधित बसों पर नहीं पड़ता। इससे लोकल रूटों पर यात्रियों को बसों के लिए भटकना पड़ता है।
300 किमी चलने पर एक बस औसतन लाती है 12,000 रुपये
रोडवेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक एक बस एक दिन में औसतन 300 किमी चलने पर 12,000 से 15,000 रुपये लाती है। निगम की भाषा में इसे लोड फैक्टर कहते हैं। त्योहारों के सीजन में लोड फैक्टर 80-90 फीसदी तक पहुंच जाता है। सामान्य दिनों में यह 50 फीसदी के आसपास रहता है। ऐसे में रोजाना करीब 40 बसें वर्कशॉप में खड़ी रहने से रोडवेज को चार लाख तक का घाटा हो रहा है।
बेवजह खड़ी नहीं होतीं अनुबंधित बसें
अनुबंधित बसों की मरम्मत और सर्विस आदि का जिम्मा बस मालिक का होता है। वे अपनी बसों को चकाचक रखते हैं। फिटनेस के मामले में निगम की बसों के मुकाबले अनुबंधित बसें काफी बेहतर और सुविधाजनक होती हैं। इससे वे खराबी की वजह से खड़ी नहीं होती हैं।
वर्कशॉप में खड़ी रहने वाली बसों की स्थिति
तारीख रुहेलखंड डिपो बरेली डिपो
25 मई 18 15
26 मई 21 19
27 मई 17 21
28 मई 15 13
29 मई 22 19
30 मई 17 15
31 मई 16 18
01 जून 19 17
02 जून 20 19
वर्जन
यात्रियों को समस्या न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। परिचालकों की कमी के कारण कुछ समस्या हो रही है। इसे भी दूर कर लिया जाएगा। सभी रूटों पर पर्याप्त बसों का संचालन हो रहा है। – दीपक चौधरी, आरएम



