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Bareilly News: डॉ. आईएस तोमर बिना सिंबल लड़े चुनाव, सपा के बड़े नेताओं ने भी बनाई दूरी… कैसे मिलती जीत

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Reasons for the defeat of SP supported candidate Dr IS Tomar in Bareilly

बरेली के पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर
– फोटो : अमर उजाला

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बरेली में सपा समर्थित प्रत्याशी डॉ. आईएस तोमर को नगर निगम के चुनाव में 56 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। यह अब तक मेयर पद पर हार-जीत का सबसे बड़ा अंतर है। सपा नेता और कार्यकर्ता इतनी बड़ी हार की समीक्षा में जुट गए हैं। सपाइयों का मानना है कि पार्टी का सिंबल न लेना हार की सबसे बड़ी वजह रही। इसके अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक चुनावी सभा करनी चाहिए थी जो नहीं हुई। चुनाव में सेक्टर प्रभारी व संगठन पदाधिकारियों के बीच तालमेल भी अंत तक नहीं बैठ पाना हार का प्रमुख कारण रहा।

दरअसल, सपा के नेता इस मेयर के चुनाव में शुरू से ही यह मानकर चल रहे थे कि भाजपा के उमेश गौतम के खिलाफ शहर में लहर चल रही है। वह आसानी से चुनाव जीत लेंगे। यह सोच चुनाव की घोषणा के बाद से नामांकन और जनसंपर्क से लेकर मतदान के दिन तक दिखाई भी दी। टिकट बंटवारे को लेकर चले नाटकीय घटनाक्रम को इस हार का आधार माना जा रहा है। 

दो खेमे में बंट गई थी सपा 

टिकट बंटवारे की इसी रस्साकसी को सत्तापक्ष के नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान मुद्दा बनाया कि जिस पार्टी को प्रत्याशी ही नहीं मिल रहा है, वह चुनाव कैसे लड़ेगी। इससे पार्टी कार्यकर्ता भी अलग-अलग खेमे में दिखाई दिए और चुनाव तक सक्रिय नहीं हो सके। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने फोन पर संजीव सक्सेना से बात की, उसके बाद तक सपा के पदाधिकारी दो खेमे में बंटे थे। एक खेमा संजीव सक्सेना के साथ खड़ा था और एक खेमा डॉ. आईएस तोमर के आवास पर बैठकें कर रहा था। 


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