Bareilly News: धरती में कम घुलेगा केमिकल… फसलें होंगी सेहतमंद
बरेली। वैसे तो हर वर्ष खाद की खपत बढ़ाने का लक्ष्य रहता है, लेकिन यह पहला मौका है जब खपत कम करने का लक्ष्य मिला है। यह कवायद धरती की उपजाऊ क्षमता को बेहतर करने और रासायनिक खाद के इस्तेमाल को धीरे-धीरे कम करने के लिए है। इसे पीएम प्रणाम योजना के तहत अमल में लाया जा रहा है। बरेली में एक वर्ष के भीतर 5000 मीट्रिक टन खाद की खपत घटाने की कार्ययोजना बनी है।
योजना के तहत किसानों को रासायनिक खाद के बजाय वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना है। नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर अमल की जिम्मेदारी कृषि विभाग के अधिकारियों को दी गई है। एपीके, डीएपी, यूरिया, पोटाश की बोरी में आने वाली रासायनिक खाद की खपत प्रति वर्ष दो से तीन प्रतिशत तक कम करनी है। अभी तक प्रति वर्ष दो से तीन फीसदी बढ़ोतरी होती रही है।
केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने तीन वर्ष के आंकड़े सामने रखते हुए जनपदवार खाद की वार्षिक खपत का औसत निकाला है। उसी आधार पर कमी का लाने का खाका खींचा है। योजना 2023-24 से 2025-25 तक प्रस्तावित है। आगे परिणामों के आधार पर योजना को विस्तार दिया जाएगा। तरल यूरिया नैनो, तरल डीएपी, सल्फर कोटेड गोल्ड यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए विकास खंड स्तर पर गोष्ठियां की जाएंगी। खाद की खपत में तुलनात्मक रूप से सर्वाधिक कमी वाले पांच जनपदों के जिलाधिकारियों और जिला कृषि अधिकारियों को राज्य सरकार पुरस्कृत करेगी।
वर्जन
रासायनिक खादों के असंतुलित इस्तेमाल से जमीन की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है। खाद के संतुलित इस्तेमाल के लिए जागरूकता पैदा की जाएगी। जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि जमीन में आर्गेनिक कार्बन (जीवांश) बढ़ सके। -धीरेंद्र चौधरी, जिला कृषि अधिकारी, बरेली
जागरूक हो जाएं किसान तो खाद पर कम होगा खर्च
नैनो यूरिया 225 रुपये की 500 मिलीलीटर आती है। यह एक एकड़ फसल के लिए पर्याप्त है। इतने ही खेत के लिए आमतौर पर किसान 65 किलोग्राम दानेदार यूरिया लगा रहे हैं। 45 किलो भार वाली एक बोरी यूरिया 266.50 रुपये की है। किसान 65 किलोग्राम तक डालते हैं। अगर नैनो यूरिया का इस्तेमाल करें तो 150 रुपये प्रति एकड़ बचत हो सकती है। दानेदार यूरिया पौधे की जड़ से काम करती है, जबकि नैनो यूरिया पत्तों के माध्यम से पौधे को पोषण देती है। दानेदार यूरिया का 75 फीसदी हिस्सा बर्बाद हो जाता है। 25 फीसदी पौधों के काम आता है। नैनो का पूरा उपयोग पौधे के लिए हो जाता है।
जिला औसत खपत नया लक्ष्य
बरेली 2,36,973 2,31,533
बदायूं 2,80,082 2,73,267
पीलीभीत 1,78,432 1,74,306
शाहजहांपुर 3,03,170 2,95,601
(आंकड़े मीट्रिक टन में)



