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Bareilly News: दस साल में प्रदूषण का स्तर सबसे कम, फिर भी गंधक के धुएं में घुटता रहा दम

Connect News 24

बरेली। बीते दस साल में इस बार दिवाली पर प्रदूषण का स्तर सबसे कम रहा। दिवाली से पहले हुई हल्की बारिश व तेज हवा इसकी प्रमुख वजह रही। वहीं, इस बार ग्रीन पटाखों के प्रयोग से भी गंधक का धुआं कम उठा। इन सबके बाद भी प्रदूषण का आंकड़ा सेहत के लिए खतरनाक स्तर तक पहुंच ही गया।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह के मुताबिक पिछले साल दिवाली के बाद भोर में और फिर अगले दिन हवा में प्रदूषण का स्तर 262 दर्ज हुआ था। जबकि, इस साल दिवाली से पहले दिनभर बूंदाबांदी और फिर तेज हवा रक्षा कवच बनी। शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 78 दर्ज हुआ था पर दिवाली की रात यह 230 और सोमवार शाम को 220 पहुंच गया। हालांकि, यह पिछले साल के मुकाबले 34 अंक कम रहा। सिविल लाइंस का एक्यूआई रविवार को 190 और सोमवार को 240 दर्ज हुआ। राजेंद्रनगर में 160 और 200 रहा।

कब कितना रहा एक्यूआई

वर्ष एक्यूआई

2012 378

2013 398

2014 421

2015 442

2016 396

2017 410

2018 435

2019 398

2020 392

2021 415

2022 262

2023 230

नोट : आंकड़े क्षेेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय के अनुसार।

विशेषज्ञों के मुताबिक बीते वर्षों में दिवाली की रात कोहरा छाया रहता था। पटाखों से निकला धुआं संघनित होकर धुंध की पर्त के तौर पर मंडराता रहता था। इस साल कोहरा न होने से धूल व धुएं का संघनित न होना भी प्रदूषण से निजात की वजह बना।

धनतेरस के साथ ही शहर में चल रहे निर्माण कार्य स्थगित हो गए। इस वजह से धूल हवा में नहीं घुल सकी। भैया दूज के बाद ही ये निर्माण कार्य शुरू होंगे। इस वजह से अभी दो दिन और राहत रहेगी।

प्रगतिशील किसान सर्वेश के मुताबिक पराली जलाने पर हो रही कार्रवाई को लेकर किसान भी जागरूक हुए हैं। नतीजा, इस साल पराली जलाने की महज 11 घटनाएं हुई हैं। जबकि, बीते वर्षों में दिवाली तक पराली जलाने की 30 से ज्यादा घटनाएं होती थीं।

सोमवार सुबह 11 बजे के बाद तकनीकी खामी के चलते सिविल लाइंस स्थित जीआईसी स्कूल में लगा ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम खराब हो गया। लिहाजा, मैन्युअल एक्यूआई रिपोर्ट तैयार की गई। अधिकारियों ने सिस्टम को जल्द दुरुस्त कराने की बात कही है।

दिवाली पर झुलसने, जलने या दुर्घटना की आशंका को देखते हुए जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं मुस्तैद रहीं। पर इस बार दिवाली पर या अगले दिन तक कोई भी झुलसने, जलने का गंभीर मामला अस्पताल नहीं पहुंचा। वहीं, तीन लोग सामान्य झुलसने पर मरहम-पट्टी कराकर लौट गए।

वायु प्रदूषण का पैमाना

– 0 से 50 तक हवा शुद्ध

– 51 से 100 तक सामान्य

– 101 से 150 तक संवेदनशील

– 151 से 200 तक मध्यम प्रदूषित

– 201 से 300 तक हानिकारक

– 301 से 500 तक अत्यधिक प्रदूषण


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