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Bareilly News: पत्राचार में उलझे जिम्मेदार, 40 दिन बाद भी 86 स्ट्रीट लाइटों को उजाले का इंतजार

Connect News 24

बरेली। लाल फाटक पुल पर 18 लाख की लागत से लगीं 86 स्ट्रीट लाइटों को 40 दिन बाद भी उजाले का इंतजार है। अधिकारी पत्राचार में उलझे हुए हैं। वह एक-दूसरे के पाले में गेंद डालने में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं। स्ट्रीट लाइटों के लिए अब तक बिजली कनेक्शन नहीं हो सका है। वहीं, इनके रखरखाव को लेकर भी पेच फंसा हुआ है। कोई भी विभाग यह जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है।

अप्रैल में पुल का निर्माण पूरा हुआ पर स्ट्रीट लाइटें लगाने में ठेकेदार ने देरी कर दी। 20 अक्तूबर को लाइटें लग गईं तो 31 अक्तूबर को उनका ट्रायल हुआ। अब नवंबर भी बीत रहा है पर उनके रखरखाव के लिए कोई विभाग तैयार नहीं हुआ। सेतु निगम के अभियंता, जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी व जिलाधिकारी एक-दूसरे को पत्र लिखने में व्यस्त हैं। समाधान कब निकलेगा? यह सवाल उन लोगों का है जो अंधेरे में पुल से गुजरते हैं। सांसद धर्मेंद्र कश्यप के मीडिया प्रभारी राहुल कश्यप ने डीएम से बातचीत की तो उन्होंने जल्द समाधान का भरोसा दिया है।

कब-कब क्या हुआ

– पहली अप्रैल को लोक निर्माण मंत्री ने लोकार्पण किया। स्ट्रीट लाइटें लगने से पहले सेतु निगम ने कैंट बोर्ड से संपर्क किया, लेकिन बोर्ड ने जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर दिया।

– 28 जुलाई को तत्कालीन डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने क्षेत्र पंचायत क्यारा को स्ट्रीट लाइट की जिम्मेदारी संभालने के निर्देश दिए।

– 20 अक्तूबर को लाइटें लग गईं और 31 अक्तूबर को ट्रायल हुआ। कैंट बोर्ड के इन्कार के बाद सेतु निगम ने क्यारा के बीडीओ को पत्र लिखा। बीडीओ ओमप्रकाश ने जवाब दिया कि न तो उनके पास तकनीकी कर्मचारी हैं, न ही बजट।

– 31 अक्तूबर को डीएम रविंद्र कुमार ने खंड विकास अधिकारी और सेतु निगम के साथ समन्वय करके समाधान कराने के निर्देश जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी को दिए। वह भी समाधान नहीं करा पाईं।

– 22 नवंबर को जिलाधिकारी ने सेतु निगम, लोक निर्माण विभाग व जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी के साथ फिर बैठक की। लोक निर्माण विभाग को पुल लेने के निर्देश दिए। स्ट्रीट लाइट की जिम्मेदारी लेने के लिए के लिए अपर मुख्य अधिकारी को पत्र भेजा पर जिला पंचायत व्यवस्था संभालने के लिए तैयार नहीं है।

अफसर दें ध्यान तो निकलेगा समाधान

विशेषज्ञ की राय

सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता राजेंद्र आर्य का कहना है कि ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायत के पास स्ट्रीट लाइट का बिल भरने के लिए अलग से कोई बजट नहीं होता है। न ही कोई हाइड्रोलिक सीढ़ी और लाइनमैन की व्यवस्था होती है। ऐसे में नगर निगम, बीडीए जैसी बड़ी संस्थाएं ही स्ट्रीट लाइटों के संचालन की व्यवस्था संभाल सकती है।

जिला पंचायत सदन के फैसले पर चलती है। स्ट्रीट लाइटों का संचालन जिला पंचायत अपने हाथ में लेगी या नहीं, यह निर्णय सदन में ही होगा। स्ट्रीट लाइटों के बिल का भुगतान भी करना होगा। इसीलिए मैंने डीएम का पत्र जिला पंचायत अध्यक्ष को भेज दिया है। आगे का निर्णय अध्यक्ष वही लेंगी। – डॉ. नीतू सिसौदिया, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत

जब से लाइटें लगीं हैं, सेतु निगम लगातार विभिन्न विभागों के साथ संपर्क बनाए हुए है ताकि कनेक्शन हो जाए और लाइटें रोशन हो जाएं। सेतु निगम कहीं भी लाइटों का संचालन अपने हाथ में नहीं रखता। -देवम वर्मा, अभियंता सेतु निगम


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