Bareilly News: इज्जतनगर बस अड्डा के लिए दो करोड़ और मिले
बरेली। इज्जतनगर में निर्माणाधीन बस अड्डा के लिए शासन ने दो करोड़ रुपये की एक और किस्त जारी कर दी है। बजट न मिलने से निर्माण कार्य करीब एक वर्ष से बंद पड़ा है। अब जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है। शहर में यातायात का दबाव घटाने के लिए सेंट्रल जेल की खाली जमीन पर नए बस अड्डा के निर्माण का काम यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन करा रहा है। नया बस अड्डा बनने के बाद शहर में रोडवेज बसों का दबाव 70 फीसदी तक कम हो जाएगा।
शहर में बरेली डिपो का पुराना बस अड्डा और रुहेलखंड डिपो का सेटेलाइट बस अड्डा है। सेटेलाइट बस अड्डा पर रोजाना औसतन 360 और पुराना बस अड्डा पर करीब 300 बसों का आगमन होता है। दोनों बस अड्डों पर सामान्य दिनों में रोजाना 30 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। पुराना बस अड्डा काफी व्यस्त इलाके में है। यहां से बदायूं, कासगंज, एटा, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हल्द्वानी, मुरादाबाद, दिल्ली रूटों की बसों का संचालन होता है। सेटेलाइट बस अड्डा से उत्तराखंड, दिल्ली, लखनऊ, पीलीभीत, फर्रुखाबाद की ओर जाने वाली बसों का संचालन होता है। यह इलाका भी व्यस्त है। बसों के दबाव के कारण यहां जाम लगा रहता है।
शहर में रोडवेज बसों का दबाव कम करने के लिए वर्ष 2020 में शासन ने इज्जतनगर में बस अड्डा निर्माण को स्वीकृति दी थी। फरवरी 2020 में कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रशासन ने इज्जतनगर में केंद्रीय कारागार की 2.285 हेक्टेयर भूमि परिवहन निगम को हस्तांतरित कर दी। बस अड्डे के लिए 16.72 करोड़ का बजट स्वीकृत करने के साथ ही पहली किस्त में तीन करोड़ जारी भी कर दिए गए। बजट मिलने के बाद निर्माण शुरू हो गया, लेकिन दूसरी किस्त में देरी के कारण एक साल से निर्माण ठप है।
सेटेलाइट और पुराना बस अड्डा पर कम होगा दबाव
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी का कहना है कि इज्जतनगर में बस अड्डा बनने से सेटेलाइट और पुराना बस अड्डा से संचालित होने वाली लखनऊ, देहरादून, हल्द्वानी, टनकपुर, पीलीभीत, फर्रुखाबाद समेत अन्य जिलों की बसों का संचालन वहीं से किया जाएगा। इससे दोनों बस अड्डों से करीब 70 फीसदी बसों का लोड कम हो जाएगा।



