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Bareilly News: वैक्सीन परीक्षण की तकलीफ से पशुओं को निजात दिलाने में जुटे वैज्ञानिक

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बरेली। लैब में तैयार वैक्सीन के परीक्षण के दौरान बेजुबान पशुओं का जीवन दांव पर होता है। उनको बेहिसाब दर्द से गुजरना पड़ता है। पशुओं को इससे निजात दिलाने के लिए वैज्ञानिक अब वैकल्पिक मॉडल तैयार करने में जुटे हैं।

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर के जैविक मानकीकरण विभाग के विभागाध्यक्ष प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रणव धर के मुताबिक किसी वैक्सीन की जांच के लिए उन्हें पशुओं में चैलेंज करना पड़ता है या फिर विभाग में मौजूद वैकल्पिक मॉडल पर परीक्षण करते हैं। जिनके मॉडल नहीं हैं, उसमें अभी जांच चल रही है। जैसे कि गंबोरो डिजीज, रैबीज आदि। अब वैकल्पिक मॉडल खोजे जा रहे हैं, ताकि सीधे तौर पर पशु-पक्षियों को दर्द देने के बजाय वैकल्पिक मॉडल पर वैक्सीन के असर की जांच हो सके।

सूअर की वैक्सीन का वैकल्पिक मॉडल तैयार

क्लासिकल स्वाइन फीवर वैक्सीन के परीक्षण के लिए वैकल्पिक मॉडल तैयार करने में जैविक मानकीकरण विभाग ने सफलता हासिल कर ली है। लिहाजा, अब सूअर में चैलेंज की जरूरत नहीं। सीधे सेल कल्चर में परीक्षण हो सकता है। इस मॉडल को तैयार करने में डॉ. प्रणव धर टीम लीडर रहे। अब भविष्य में और वैक्सीन के परीक्षण के लिए वैज्ञानिक अन्य वैकल्पिक मॉडल तैयार करने में जुटे हैं।

फोटो: परीक्षण में सफल होने पर ही बाजार में पहुंचती हैं वैक्सीन

डॉ. प्रणव धर के मुताबिक नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनएडीसीपी) ने जैविक मानकीकरण विभाग को चार बीमारियों के वैक्सीन की परीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें एफएमडी, ब्रूसेलोसिस, पीपीआर, क्लासिकल स्वाइन फीवर शामिल हैं। साथ ही, देश की नौ निजी कंपनियों और 20 से ज्यादा सरकारी प्रयोगशाला से तैयार वैक्सीन का भी परीक्षण हो रहा है। इन संस्थानों में जो वैक्सीन तैयार होती है, उनके प्रथम तीन बैच का परीक्षण इसी विभाग में होता है। यहां से सफल होने पर ही वैक्सीन को बाजार में पहुंचाने का लाइसेंस मिलता है। पिछले साल एफएमडी वैक्सीन के 18 बैच, ब्रूसेलोसिस के 128 बैच, पीपीआर के 33, सीएसएफ के 14 बैच का परीक्षण किया। इसके अलावा ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से भेजे गए 61 सैंपल का परीक्षण किया। इसमें सबसे ज्यादा पोल्ट्री के 20, अन्य जानवरों के 16, एंटीजन के 17, बैक्टीरियल के आठ बैच शामिल रहे।

विदेश से आने वाली वैक्सीन का भी हो रहा परीक्षण

जैविक मानकीकरण विभाग में स्वदेशी के अलावा नीदरलैंड, ब्राजील, स्पेन, इटली, इंडोनेशिया, फ्रांस, साउथ कोरिया व अन्य देशों से आयातित वैक्सीन का भी परीक्षण हो रहा है। वैक्सीन और सैंपल परीक्षण का कार्य डॉ. प्रणव धर और उनकी टीम में शामिल प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सलाउद्दीन कुरैशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विक्रमादित्य उपमन्यु, वैज्ञानिक डॉ. सोनालिका महाजन, वैज्ञानिक डॉ. साइमा के लतीफ संयुक्त रूप से कर रहे हैं।

फोटो : विभाग का होगा विस्तार ताकि देश

की मांग के अनुसार हो सके परीक्षण

आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक प्रधानमंत्री की ओर से चल रही निशुल्क टीकाकरण मुहिम तभी सफल होगी जब वैक्सीन गुणवत्तापूर्ण होगी। गुणवत्ता की जांच का कार्य आईवीआरआई कर रहा है। यह संस्थान की जिम्मेदारी है कि भविष्य में जितनी मात्रा में वैक्सीन की जरूरत होगी, उसे टेस्ट करें। लिहाजा, जैविक मानकीकरण विभाग के विस्तार की जरूरत है, ताकि देश की जरूरत के मुताबिक गुणवत्तापूर्ण वैक्सीन की जांच और उसकी पूर्ति हो सके।


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