Bareilly News: बेलगाम हो रहे किशोर, परिवार से बना रहे दूरी
बरेली। वर्तमान परिवेश में किशोर बेलगाम हो रहे हैं। उनकी सहनशीलता कम हो रही है, वहीं गुस्से की प्रवृत्ति बढ़ रही है। अभिभावकों की रोक-टोक से बचने के लिए वे परिवार से दूरी बना रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में बाल कल्याण समिति में ऐसे कई मामले आए जब किशोर-किशोरियों ने खुद को घर के बजाय अनाथालय या नारी निकेतन भेजने का अनुरोध किया है। काउंसलिंग के बाद भी वे परिजनों के साथ जाने के लिए सहमत नहीं हुए।
किशोरी बोली, मुझे नारी निकेतन भेज दें
केस- 1
बृहस्पतिवार को आए एक मामले में पिता के व्यवहार से नाराज किशोरी ने घर जाने से इन्कार कर दिया। कहा कि, उसे नारी निकेतन भेज दें। समिति के सदस्य, पुलिस व परिजन सभी समझाकर हार गए तो उसे नारी निकेतन भेज दिया गया। किशोरी ने आरोप लगाया कि पिता उस पर अनावश्यक गुस्सा करते हैं। दोस्त से बात करने पर उसका फोन छीन लिया और स्कूल जाना भी बंद करा दिया है। वहीं, पिता ने भी स्कूल भेजने और फोन देने से मना कर दिया।
दूसरे बच्चों से तुलना पसंद नहीं
केस- 2
कुछ दिन पहले शेरगढ़ के किशोर ने अभिभावकों के साथ जाने से मना कर दिया। उसने कहा कि माता-पिता को दूसरों के बच्चे ज्यादा अच्छे लगते हैं। छोटी-छोटी बात पर दूसरे बच्चों से उसकी तुलना की जाती है। विरोध पर डांट पड़ती है। किशोर ने कहा कि अगर जबरदस्ती उसे माता-पिता के साथ भेजा गया तो वह कहीं और चला जाएगा। दादी-बाबा के समझाने पर वह उनके साथ गांव जाने के लिए तैयार हो गया पर माता-पिता के साथ नहीं गया।
घर की जगह पार्क में जाकर रोने लगी किशोरी
केस- 3 हरुनगला की किशोरी को परिजनों की रोकने-टोकने की आदत अच्छी नहीं लगी। एक प्रोजेक्ट में उसने दोस्त की मदद ली तो पिता ने पिटाई कर दी। अभिभावकों ने उसे स्कूल ट्रिप पर भी नहीं भेजा। इसको लेकर कक्षा के अन्य बच्चों ने उसका मजाक उड़ाया। यह बात उसे काफी चुभी। कोचिंग से घर लौटने के बजाय वह पार्क में जाकर रोने लगी। अन्य लोगों ने इसकी जानकारी परिजनों को दी लेकिन छात्रा घर जाने के लिए तैयार नहीं हुई।
कम हो रहा बच्चों का धैर्य, पैरेटिंग में भी कमी
कहीं न कहीं पैरेंटिंग में कमी है। आज के अभिभावक बच्चों को आसानी से चीजें उपलब्ध करा देते हैं। पहले बच्चों को कहा जाता था कि पेपर अच्छा करोगे तब पसंद की चीज मिलेंगी। इससे उनमें मेहनत करने और धैर्य रखने की प्रवृत्ति विकसित होती थी। अब ऐसा नहीं है। बच्चों और अभिभावकों के बीच कम होता संवाद भी इसकी प्रमुख वजह है। बच्चे ही अभिभावकों से दूर नहीं हो रहे, बल्कि अभिभावक भी बच्चे से दूर हुए हैं। अभिभावकों को हर बिंदु पर बच्चों से प्यार से बात करनी चाहिए। बच्चों से समझदारी की उम्मीद नहीं कर सकते। अभिभावक स्वयं ही बच्चों से बात कर उनको अपनी स्थिति के बारे में समझाएं और उनके मन की बात को भी जानने का प्रयास करें। – यशिका वर्मा, मनोविज्ञानी


