Bareilly News: एक मार्ग के दो प्रस्ताव… एक खारिज, दूसरा अटका
बरेली। बड़ा बाईपास से सेटेलाइट मार्ग के सिक्सलेन और फोरलेन के दो प्रस्ताव बनाकर अफसरों ने शासन को भेजे थे, लेकिन दोनों में से अभी तक किसी पर मुहर नहीं लग सकी है। सिक्सलेन के प्रस्ताव पर शासन की आपत्ति आई है, जबकि फोरलेन के प्रस्ताव पर फिर से विचार किया जा रहा है। दो-दो मंडलायुक्तों की पैरवी के बाद भी किसी प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिली है।
11 किलोमीटर के हिस्से को सिक्सलेन कराने के लिए करीब 302 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने 18 मई 2023 को भेजा था। इससे पहले फोरलेन के लिए 76.17 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पूर्व मंडलायुक्त संयुक्ता समद्दार ने फरवरी 2022 को भेजा था। तब शासन की वित्त समिति ने स्वीकृति भी जारी कर दी थी, लेकिन शासनादेश होने से पहले ही वित्तीय वर्ष समाप्त गया और बजट अटक गया।
नए वित्तीय वर्ष में जब मौजूदा मंडलायुक्त ने इस मार्ग को देखा। रास्ते में हवाई अड्डा, नामचीन होटल, शिक्षण संस्थान, विश्वविद्यालय आदि की जरूरत को समझा तो मार्ग को सिक्सलेन करने का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी से तैयार कराया। इसकी लागत करीब 302 करोड़ रुपये निकली।
शासन ने इतनी अधिक लागत के प्रस्ताव को मंजूर करने में रुचि नहीं दिखाई। कुछ तकनीकी कारण बताते हुए इस पर आपत्तियां लगाकर प्रस्ताव को वापस भेजा गया। बताया गया कि 200 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव की मंजूरी कैबिनेट की ओर से की जाती है। यह भी बताया गया कि इस मार्ग पर फिलहाल सिक्सलेन के हिसाब से ट्रैफिक नहीं है। इस बीच फोरलेन के पहले के प्रस्ताव पर अमल के इरादे से एक बार फिर रिपोर्ट मांगी गई है। पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
इंतजार में जनता भुगत रही खामियाजा
बड़ा बाईपास से बैरियर टू तक मार्ग की हालत ज्यादा खस्ता है। दो वर्ष हो चुके हैं, अभी तक ठीक नहीं हुआ। मार्ग चौड़ीकरण के प्रस्ताव के इंतजार में इसे गड्ढा मुक्त भी नहीं किया गया है। खतरनाक गड्ढों के कारण वाहन सवारों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है। जब से नाथ कॉरिडोर का एलान हुआ है, तब से यह माना जा रहा है कि जल्दी मंजूरी मिलेगी, लेकिन कॉरिडोर के दो मंदिर भी इसी मार्ग पर हैं। इसलिए आवागमन में कठनाई है। डिवाइडर टूटकर काफी बड़े हिस्से से गायब हो चुका है।
फोरलेन का प्रस्ताव शासन को गया है। शासन के निर्णय का इंतजार है। सिक्सलेन पर आपत्ति आई थी। उनका जवाब देकर प्रस्ताव वापस शासन को भेज दिया है। -संजय कुमार तिवारी, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी


