देश को सांप्रदायिकता की आग में झोंक रही भाजपा: शेरवानी

सपा के बूथ सम्मेलन में कार्यकताओं को संबोधित करते पूर्व सांसद धमेंद्र यादव। संवाद
बदायूं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर समाजवादी पार्टी ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी। रविवार को बदायूं विधानसभा के सेक्टर प्रभारी व बूथ प्रभारियों के कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। कई सालों की राजनीतिक रार के बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव व पूर्व विधायक आबिद रजा एक ही मंच पर नजर आए, जिसकी विशेष चर्चा रही।
रविवार को लालपुल स्थित एक मैरिज हॉल में आयोजित सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी ने कहा कि आज पूरा देश महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है लेकिन भाजपा की डबल इंजन की सरकार देश की जनता को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने पर आमादा है। यही वजह है कि पूरे देश में आईएनडीआईए गठबंधन को जनता का समर्थन मिल रहा है। पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब-जब प्रदेश में सपा की सरकार बनी है तब-तब पूरे प्रदेश में आम जनता के हित में जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई गईं। सरकार के खजाने का मुंह विशेषकर बदायूं के विकास के लिए खोल दिया। उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस बार भी बदायूं की जनता लोकसभा चुनाव में उन्हें अपना आशीर्वाद देगी।
पूर्व विधायक आबिद रजा ने कहा कि आने वाला लोकसभा चुनाव लोकतंत्र तथा संविधान को बचाने का चुनाव है। यदि इस बार हमसे कहीं भी चूक हो गई तो हमारी आने वाली नस्लें हमसे वो सवाल पूछेंगी, जिसका कोई भी जवाब हमारे पास नहीं होगा। इसलिए पिछली सारी बातों को भूलकर हम सभी को सपा को मजबूत करना है। इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह यादव, नरेश प्रताप सिंह, योगेंद्र पाल सिंह तोमर, फीरोज़ खान, ओमवीर सिंह, राजीव लोधी, पीयूष रंजन यादव, फरहत अली, मोतशाम सिद्दीकी, मोहम्मद मियां, प्रभात अग्रवाल आदि मौजूद रहे। संचालन सुहैल सिद्दीकी ने किया।
गले मिलकर मनमुटाव खत्म होने का दिया संदेश: पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव व पूर्व विधायक आबिद रजा के बीच वर्ष 2016 में शुरू हुई राजनीतिक रार को कम करने के प्रयास कई बार हुए लेकिन ये सफल नहीं हो सके। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भाई होने के नाते धर्मेंद्र यादव ने साल 2016 में आबिद रजा को पार्टी से हटवा दिया था लेकिन राजनीति के पुराने खिलाड़ी माने जाने वाले आबिद फिर भी 2017 का विधानसभा का चुनाव सपा के टिकट से ही लड़े। इसके बाद एक बार पूर्व नगर विकास मंत्री आजम खां ने दोनों के बीच मनमुटाव दूर कराने का प्रयास किया, लेकिन दूरियां कम नहीं हुईं। अब पांच साल से ज्यादा के बाद एक बार फिर दोनों एक मंच पर न केवल नजर आए बल्कि गले मिलकर कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने का प्रयास भी किया कि दोनों के बीच मनमुटाव दूर हो गया है। दोनाें को एक मंच पर लाने में सलीम शेरवानी की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शेरवानी ने की आबिद की आंवला से चुनाव लड़ने की सिफारिश : पूर्व विधायक आबिद रजा के सपा में शामिल होने के बाद ही राजनीतिक गलियारों में उनके आंवला सीट से लड़ने की चर्चा शुरू हो गई थी। इस बात पर रविवार को पूर्व मंत्री सलीम शेरवानी ने उस वक्त मुहर लगा दी, जब उन्होंने मंच से कहा कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से बदायूं सीट से धर्मेंद्र यादव व आंवला सीट से आबिद रजा को चुनाव लड़ाने की सिफारिश की है। शेरवानी ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद के लिए बदायूं से टिकट इसलिए नहीं मांगा, क्योंकि तब भाजपा के पास धर्म का केवल एक ही मुद्दा रह जाता। इधर, राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि पत्नी फात्मा रजा के निकाय चुनाव जीतने के बाद आबिद ने जिस प्रकार अपनी छवि एक सेक्युलर नेता की बनाई है, उससे सपा को न केवल आंवला बल्कि बदायूं सीट पर भी लाभ होगा। आंवला सीट पर पिछले करीब 25 सालों से सपा अपना कब्जा नहीं जमा पाई है।