Budaun News: कस्तूरबा विद्यालयों में खाने की जांच करेगी कमेटी
बदायूं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं को मेन्यू के हिसाब से भोजन नहीं दिया जा रहा है। उसकी गुणवत्ता भी अच्छी नहीं है। दूध भी कम मात्रा में दिया जा रहा है। इस तरह की शिकायतें राज्य परियोजना निदेशक के पास पहुंची तो उन्होंने पांच सदस्यीय टीम को नियमित विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
जिले में 18 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। इनमें 1800 छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। विद्यालय में रहने से लेकर खाने-पीने का पूरा खर्च सरकार वहन करती है। ऐसे में कई बार भोजन उपलब्ध कराने वाली फर्म विद्यालय स्टाफ के साथ मिलकर खाद्यान्न की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ करती हैं। यहां तक कि स्टाफ छात्राओं को दिए जाने वाले दूध में भी घालमेल कर निर्धारित मात्रा से बेहद कम देता है।
इसको लेकर राज्य परियोजना निदेशक विजय किरन आनंद ने पत्र जारी कर कहा कि पांच सदस्यीय टीम इसकी जांच करेगी। टीम में तहसीलदार, बीडीओ, बीईओ, वार्डन और एक विद्यालय प्रबंध समिति की महिला सदस्य शामिल होगी। इनके द्वारा विद्यालयों के सभी मदों में उपलब्ध कराई धनराशि, उसके सापेक्ष क्रय की सामग्री की मात्रा, गुणवत्ता की जांच, परीक्षण कर आख्या रजिस्टर पर नोट की जाएगी।
काली सूची में डाली जाए आपूर्ति दाता फर्म
राज्य परियोजना निदेशक ने साफ कहा है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में खाद्यान्न आपूर्ति की निर्धारित निधि की समिति जांच करे। साथ ही सामग्री का सैंपल बीएसए कार्यालय में संरक्षित किया जाए। फर्म द्वारा उपलब्ध कराए गए सैंपल और विद्यालय की आपूर्ति की गुणवत्ता में अंतर पाए जाने पर आपूर्ति दाता फर्म को काली सूची में डाला जाए। बता दें कि दातागंज एसडीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह ने समरेर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का जून में निरीक्षण किया था। तब विद्यालय में छात्राओं को दिए जाने वाले खाने की गुणवत्ता बेहद घटिया स्तर की पाई गई, साथ ही सफाई व्यवस्था भी खराब मिली। एसडीएम ने वार्डन सीमा मिश्रा को गुणवत्ता सुधारने के लिए निर्देशित किया था।