Budaun News: सवालों के जवाब देने से बचते रहे डीसी मनरेगा
बदायूं। डीसी मनरेगा ने योजना के क्रियान्वयन के लिए रखे गए कर्मचारियों को प्रशासनिक मद से अधिक भुगतान कर दिया गया। इसकी जांच शासन स्तर से की गई। इसमें प्रथम दृष्ट्या उन्हें दोषी पाया गया है। इन्हीं आरोपों में शासन की ओर जांच के आदेश दिए हैं। आदेश प्राप्त होने के बाद दिनभर प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मची रही और दिनभर चर्चाएं होती रहीं। वहीं, डीसी मनरेगा सवालों का जवाब देने से बचते रहे।
मनरेगा कार्यों की देखरेख के लिए रोजगार सेवकों को तैनात किया गया है। दो साल पहले तक रोजगार सेवकों को मनरेगा के तहत हुए काम के अनुरूप धनराशि मानदेय के रूप में दी जाती थी, लेकिन पिछले दो सालों से एक निश्चित मानदेय का भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद में आदेश के दृष्टिगत निश्चित मानदेय हर माह रोजगार सेवकों को भुगतान किया जाना लगा। ऐसा जनपद बदायूं समेत प्रदेश के 17 जिलों के डीसी मनरेगा ने किया। जांच हुई तो ऐसे में मनरेगा के प्रशासनिक मद से अनुमन्यता से अधिक व्यय पाया गया। संयुक्त सचिव ने डीसी मनरेगा को नोटिस जारी किया है।
डीसी मनरेगा के पद पर कार्यरत रामसागर यादव के गीत संग्रह ”फूल नहीं पलाश” का विमोचन रविवार को विकास भवन सभागार में किया गया। वहां उनसे इस बारे में सवाल किया गया तो वह हर सवाल का जवाब देने से बचते नजर आए। बाद में उनको कॉल करके भी पूछने की कोशिश की गई तो कॉल भी रिसीव नहीं हुई।
यह है प्रशासनिक मद
मनरेगा के तहत अगर कोई काम एक लाख रुपये का कराया जाता है, तो उसमें 60 और 40 प्रतिशत का औसत बनाया जाता है। इसमें 60 प्रतिशत काम मिट्टी का और 40 प्रतिशत काम पक्का कराया जाता है। दोनों में से 4.5 प्रतिशत प्रशासनिक मद बनता है। इस प्रशासनिक मद का उपयोग मानदेय, स्टेशनरी और पेट्रोल आदि पर खर्च किया जाता है, लेकिन जिले में 4.5 प्रतिशत प्रशासनिक मद की अपेक्षा अधिक धनराशि खर्च की गई है।