Budaun News: परिवार से दूर रहना पड़ी भारी… अब झेल रहे लाइलाज बीमारी

बदायूं। परिवार से दूर रहकर बाहर मेहनत मजदूरी करने वाले लोग दूसरी महिलाओं से असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण एड्स संक्रमित हो रहे हैं। जनवरी से अब तक 54 पुरुष एड्स संक्रमित पाए गए है, इनमें 40 असुरक्षित यौन संबंधों के कारण ही बीमारी से ग्रसित हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ऐसे मरीजों की काउंसिलिंग कर इलाज कर रहा है।
लोगों को एड्स जैसी घातक बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए प्रति वर्ष एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। एड्स वायरस जनित बीमारी है जो मुख्यत: संक्रमित लोगों से यौन संबंध बनाने के कारण होती है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के रेजर से शेव करने, संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की गई सिरिंज से इंजेक्शन लगाने या संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़वाने से भी यह बीमारी हो जाती है।
जिले में जनवरी से अब तक कुल 79 मरीज सामने आए हैं। इनमें 54 पुरुष और 25 महिलाएं हैं। पुरुषों में से 40 ऐसे हैं जो परिवार से दूर रहकर मेहनत मजदूरी करने दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में गए और वहां संक्रमित महिलाओं के संपर्क में आने और उनसे असुरक्षित यौन संबंध बनाने से संक्रमित हो गए। पीड़ित 25 महिलाओं में से कुछ ऐसी है जो संक्रमित होने के बाद भी सुरक्षित प्रसव कराकर आम महिला की तरह जीवन जी रही हैं।
पांच महिलाओं को उनके पति से मिला संक्रमण
जिले में 25 महिलाएं भी जनवरी से अब तक एड्स पीड़ित पाई गई हैं। इनमें से पांच महिलाएं ऐसी हैं जो पति के कारण संक्रमित हुई हैं। यानी पहले उनके पति संक्रमित हुए। बाकी महिलाओं के पति संक्रमित नहीं हैं। इन पांच महिलाओं ने संक्रमित होने के बाद भी सुरक्षित जीवन जीकर संतानोत्पत्ति की है। सुरक्षित प्रसव के बाद पाया गया है कि उनकी संतान एचआइवी संक्रमित नहीं है। इसके अलावा 10 महिलाएं बाहर रहकर संक्रमित हुई हैं, जबकि पांच महिलाओं को संक्रमित सिरिंज से इंजेक्शन लगने से संक्रमण हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग करता है काउंसलिंग
स्वास्थ्य विभाग जांच के बाद संक्रमित पाए गए लोगो की काउंसलिंग करता है। मरीजों को संक्रमित होने के बाद भी पहले की तरह ही सामान्य जीवन जीने के लिए जागरूक किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमित पुरुष या महिला सुरक्षित यौन संबंध बनाने पर जीवन को सुरक्षित और सुगम तरीके से जी सकते हैं। मरीज को केवल सावधानी बरतनी होती है। सावधानी की कमी से जान का खतरा हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, इसका यही इलाज है कि मरीज नियमित रूप से दवाएं खाते हुए दिनचर्या व्यवस्थित रखें।
एक बार बीमारी होने पर आजीवन रहता है संक्रमण
एचआईवी से संक्रमित होने वाला व्यक्ति जीवनभर के लिए इस वायरस से ग्रसित हो जाता है। हालांकि विशेषज्ञों ने एचआईवी से बचने के कुछ उपाय बताए हैं, वहीं एड्स रोगी के लिए कुछ दवाएं भी हैं। इनके माध्यम से रोग की जटिलता को कम किया जा सकता है, लेकिन बीमारी को दूर नहीं किया जा सकता है। एड्स को लेकर कई सारे मिथक प्रचलन में हैं। इन्हें दूर करने के लिए ही विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डाॅ. विनेश कहते हैं कि एड्स को लेकर बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। इस बीमारी में औसत आयु भले ही कम हो जाती है, लेकिन पीड़ित सामान्य जिंदगी जी सकता है। जागरूकता और बचाव ही एड्स से सुरक्षित रहने के तरीके हैं। जिले में सीएचसी और पीएचसी पर एड्स की जांच उपलब्ध है। दूसरी जांच आरसीटी (रेंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स) की जाती है। इसकी सुविधा जिला महिला अस्पताल और जिला अस्पताल के अलावा उझानी सीएचसी में है।
वर्जन
शुक्रवार को एड्स दिवस पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। अब तक मिले 79 मरीजों व उनके परिवार को जागरूक करने के साथ ही उनकी जीवनशैली को सुगम बनाने का काम किया जाएगा। इस बार की थीम लेट कम्युनिटीज लीड रखी गई है।
– डॉ. विनेश कुमार, क्षय रोग अधिकारी