Budaun News: आदेश की अनदेखी ने ले ली दो किशोरों की ले ली जान
उघैती/बिसौली (बदायूं)। इस्लामनगर और दातागंज क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेस-वे के गड्ढे में डूबकर बच्चों की मौत के बाद अगर जिम्मेदार अफसरों ने डीएम का आदेश माना होता तो शायद शनिवार सुबह बिसौली क्षेत्र में दो किशोरों की जान न जाती। डीएम मनोज कुमार ने आदेश दिया था कि जहां-जहां मिट्टी खोदी गई है या फिर निर्माण के दौरान गड्ढे हो गए हैं और उनमें पानी भर गया है। उसके आसपास बैरिकेडिंग कराएं और संकेतक बोर्ड लगाएं, लेकिन इस आदेश का पालन न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने किया और न ही निर्माण करा रही कंपनी ने।
जिले में गंगा एक्सप्रेस-वे के गड्ढों में डूबने से अब तक चार बच्चे व किशोरों की मौत हो चुकी है। पहला हादसा छह मई 2023 को दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गांव डहरपुर के पास हुआ था। वहां भी गंगा एक्सप्रेस-वे के नीचे से पानी निकास के लिए अंडरपास का निर्माण कराया जा रहा था। उसमें डहरपुर निवासी 10 वर्षीय बालक रंजीत की डूबकर मौत हो गई थी। तीन दिन पहले 28 जून को इस्लामनगर क्षेत्र के गांव नसरौल में सात वर्षीय रूपेश की गंगा एक्सप्रेस-वे के गड्ढे में डूबकर मौत हो गई थी। यह गड्ढा भी अंडरपास बनाने के लिए खोदा गया था। गड्ढे की गहराई करीब 15-20 फुट थी।
इन घटनाओं को लेकर डीएम मनोज कुमार ने सभी एसडीएम से कहा था कि वह अपने-अपने क्षेत्र में गंगा एक्सप्रेस-वे से लेकर अन्य ऐसे गड्ढों की भी बैरिकेडिंग कराएं। साथ ही वहां बोर्ड लगवाएं, जिससे लोग उनके नजदीक नहीं जाएं। गंगा एक्सप्रेस-वे के नजदीकी गांव वालों को भी समझाएं, उनके बच्चों को जागरूक करें, लेकिन निर्माण कराने वाले कंपनी के जिम्मेदारी और एसडीएम उनके आदेश पर खरे नहीं उतरे। अभी तक कहीं भी बैरिकेडिंग नहीं कराई गई और न ही संकेतक लगवाए गए। अगर डीएम का आदेश पर गौर किया होता और बैरिकेडिंग कराई गई होती तो शायद ऐपुरा गांव के दो किशोरों की डूबकर मौत नहीं हुई होती।
20 दिन पहले खोदवाया था गड्ढा
ऐपुरा गांव में जिस जगह पर पानी निकास के लिए अंडरपास बनाया जा रहा है। वहां अंडरपास के सामने करीब 20 दिन पहले गड्ढा खोदवाया गया था। पिछले तीन-चार दिन से लगातार बारिश भी हो रही है। इससे उस गड्ढे में पानी भर गया था। इस गड्ढे की गहराई भी करीब 15-20 फुट बताई जा रही है। इसके बावजूद उसके चारों ओर बैरिकेडिंग नहीं कराई गई।
डूबने की खबर सुनकर भाग गए मजदूर
दो किशोरों की डूबकर मौत की खबर वहां पास में ही काम कर रहे कुछ मजदूरों को लगी तो वे भाग गए। एक जेसीबी से भी खोदाई कराई जा रही थी। आमीन की बहन फूलबानों ने दोनों किशारों के डूबने के बाद सबसे पहले उन्हीं मजदूरों को आवाज लगाई थी, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि गड्ढे में बच्चे डूब गए हैं, वे वहां से भाग गए। अगर वह फूलबानो की आवाज सुनकर तुरंत वहां आ जाते तो शायद किशोरों को बचाया जा सकता था।
बाइक सवार ने कूदकर निकाला था फुरकान को
फूलबानों शोर मचाती हुई गांव की ओर भागी थी। तभी गांव का एक बंगाली डॉक्टर बाइक लेकर वहां से गुजर रहे थे। जैसे ही उन्होंने बालिका को शोर मचाकर भागते हुए देखा कि वह तुरंत बाइक छोड़कर गड्ढे में कूद गए और फुरकान को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद वही फुरकान को नजदीकी अस्पताल ले गए थे।
दो घंटे बाद पहुंचे अफसर, तब निकाला आमीन का शव
इस हादसे के दो घंटे बाद पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने ही कॉल करके एक जेसीबी बुलाई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जेसीबी से जितनी मिट्टी हटाई जा रही थी। गड्ढे में उतनी ही मिट्टी गिर रही थी। बमुश्किल मिट्टी हटाकर गड्ढे का पानी निकाला गया। तब कहीं आमीन का शव बाहर निकाला जा सका।