Budaun News: ग्राम पंचायतों में विकास से ज्यादा घोटाले
वित्तीय अनियमितताओं में तीन पर हो चुकी है कार्रवाई, आठ की चल रही जांच
– ग्राम पंचायत गलौथी, जगत पीपरी और बडेरिया के ग्राम प्रधानों की हो चुकी है पावर सीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले की कई ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास, गोशाला और ग्राम पंचायत निधि में घोटाले के मामले सामने आ चुके हैं। उनमें कुछ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जो विकास के नाम पर शून्य और घोटालों में अव्वल हैं। एक-एक सड़क का दो-दो बार भुगतान करा लिया गया। अब भी इस तरह की आठ ग्राम पंचायतों की जांच चल रही है।
दातागंज ब्लॉक क्षेत्र में करीब दो माह पहले ग्राम पंचायत गलौथी में गोशाला और प्रधानमंत्री आवासों में घोटाले का मामला सामने आया था। पहले प्रशासन को गोशाला में संरक्षित पशुओं का फर्जी रूप से आंकड़ा प्रस्तुत किया जा रहा था। जब डीएम मनोज कुमार ने मौके पर जाकर संरक्षित पशुओं की जानकारी ली तो फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। उसी दौरान एक व्यक्ति ने अपात्रों को आवास देने की शिकायत की।
उसकी जांच में कई अपात्रों को आवास देने का मामला पकड़ा गया। इससे प्रधान रामश्री की पावर सीज कर दी गई। सचिव राजनारायण को निलंबित कर दिया गया था। इसी तरह इस्लामनगर की ग्राम पंचायत जगत पीपरी में वित्तीय अनियमितता का मामला पकड़ा गया। यहां के प्रधान वीरेंद्र सिंह की भी पावर सीज कर दी गई।
सहसवान ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत बड़ेरिया में भी वित्तीय अनियमितता सामने आई। इस पर प्रधान सुखदेवी की पावर सीज की गई और सचिव योगेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं जिले की कई और ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमिता, प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा आदि मामलों में घोटाले की शिकायतें आ चुकी हैं। इस समय आसफपुर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत ढोरनपुर, लक्ष्मीपुर, बिसौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत परौली, अंबियापुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत दीनपुर शेखपुर, उसावां की ग्राम पंचायत टिकाई पुख्ता, इस्लामनगर की जगतुआ, म्याऊं की कैली और जगत ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत कंडेला आदि के प्रधान व सचिवों की जांच चल रही है। इनकी जांच पूरी होने पर कहीं न कहीं कार्रवाई होगी।
जिला कृषि अधिकारी कर रहे हैं दो ग्राम पंचायतों की जांच
जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश कुमार दो ग्राम पंचायतों की जांच कर रहे हैं। उन्हें ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर और ढोरनपुर की जांच सौंपी गई है। यहां के प्रधानों और सचिवों पर वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक ग्राम पंचायत की जांच रिपोर्ट दे दी थी लेकिन अधिकारियों के एतराज पर उन्हें दोबारा जांच दे दी गई है।
ग्राम पंचायतों में प्रधानों और सचिवों की शिकायतें आती रहती हैं। उनकी जांच कराई जाती है। अगर जांच में लापरवाही या भ्रष्टाचार पाया जाता है तो कार्रवाई होती है। इस समय करीब सात-आठ ग्राम पंचायतों की जांच चल रही है। उनकी जांच रिपोर्ट आए तो कुछ बताया जा सकता है।
– श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ