Budaun News: नेमत खुदा की मिलती बेटी के रूप में, देतीं दुलार-मान लोगों को बेटियां

बिल्सी में आयोजित काव्य उत्सव में हिस्सा लेते कविगण। संवाद
बिल्सी। उत्तर प्रदेश हिंदी प्रचार समिति के तत्वावधान में नगर में नारायन ग्रीन हाउस में लगातार 12 घंटे चले राष्ट्रीय युवा काव्य उत्सव का सोमवार रात समापन हो गया। इसमें देश के कई राज्यों से आए 51 युवा कवियों ने काव्य पाठ किया।
कार्यक्रम पांच सत्रों में चला। अध्यक्षता मटरूमल शर्मा ने की। मुख्य अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता रहे। सभी कवियों को सम्मानपत्र व रामदरबार का चित्र भेंट किया गया। उत्सव का शुभारंभ कवयित्री वंशिका राघव की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद हरदोई से आए तेजस्वी अवस्थी ने मुक्तक पढ़ा-
होंठों की मुस्कान नहीं हो पाए हम, उलझे थे, आसान नहीं हो पाए हम।
होने को हिंदू और मुस्लिम भले हुए, एक भले इंसान नहीं हो पाए हम।।
हरियाणा से आए कवि नीरज राव ने पढ़ा-
चाहत किसी की भी न है हमें, बस खाली चाह रखते हैं।
वैसे हम बिना डाॅक्टर के भी, मरीजों की दवा रखते हैं।
शाहजहांपुर से आए पंकज मतलबी ने पढ़ा-
मिलती नसीब से हैं लोगों को बेटियां, फिर भी नापसंद हैं लोगों को बेटियां।
नेमत खुदा की मिलती बेटी के रूप में, देतीं दुलार-मान लोगों को बेटियां।।
अल्मोड़ा से आए ललित मोहन जोशी ने सुनाया-
लूटा है मुफलिसी भूख ने मेरे देश को, लूटा है इन अमीरों ने मेरे देश को।
डंके की चोट पर कहता हूं मैं, बदलते हुक्मरानों ने लूटा है मेरे देश को।
मैनपुरी से आए कुलदीप मिश्र ने अपनी बात कुछ इस तरह कही-
कुछ चराग आंधियों में संभाले गए थे, तब कुछ घरों में उजाले गए थे।
यूं ही नहीं हम महफिल की शान बन गए, हम भी कुछ महफ़िलों से निकाले गए थे।
इसके अलावा दिल्ली से आए अभिषेक मिश्र, प्रयागराज से आए साहिल दर्पण आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर संस्था अध्यक्ष विष्णु असावा, संदीप मिश्रा, अचिन मासूम, ओजस्वी जौहरी, श्रीकृष्ण गुप्ता, शशांक रायजादा, ललितेश कुमार, हरगोविंद पाठक, डाॅ. ममता नौगरिया आदि मौजूद रहींं। संचालन पवन शंखधार, षट्बदन शंखधार व हर्षवर्धन मिश्र ने किया।

