Budaun News: फर्जी रोडवेज बसों के आगे अफसर और यात्री बेबस

फर्जी रोडवेज बस। संवाद
कई बार पकड़ी जा चुकी हैं फर्जी रोडवेज बसें, छह चालकों-परिचालकों पर उझानी में दर्ज है रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। दिल्ली-बदायूं रूट पर फर्जी रोडवेज बसों का लगातार संचालन हो रहा है। दिल्ली से लेकर बदायूं और बदायूं से लेकर दिल्ली तक सवारियों को लगातार ढोया जा रहा है। इन बसों पर काम करने वाले लोग भी परिवहन निगम के चालक-परिचालकों की तरह यूनिफॉर्म पहन रहे हैं और बाकायदा टिकट मशीन का प्रयोग भी कर रहे हैं लेकिन पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी इनके आगे बेबस साबित हो रहे हैं।
उझानी कोतवाली पुलिस ने विगत छह जून को तीन फर्जी रोडवेज बसें पकड़ी थीं। इनमें बुलंदशहर के खानपुर निवासी माशा अल्लाह, थाना अहमदगढ़ के गंगावास निवासी उमेश कुमार, अलीगढ़ के थाना जवां निवासी आशीष, हापुड़ के थाना बाबूगढ़ उर्फ चकसैनपुर निवासी भारत सिंह, गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र इशहाक नगर निवासी इस्तखार, थाना मुरादनगर क्षेत्र के गांव हिडार निवासी मनजीत सिंह आदि चालक-परिचालक पकड़े गए थे।
कोतवाली पुलिस ने अगले दिन सभी को जेल भेज दिया था। तीनों बसों को सीज कर दिया गया था। इसके अगले दिन सात जून को एक और फर्जी रोडवेज बस पकड़ी गई लेकिन उसके चालक-परिचालक भाग गए थे। बाद में इनका संचालन करने वाले चारों बसों को छुड़ा ले गए और फिर इनका संचालन शुरू हो गया।
कुछ दिनों तक यह बसें दिल्ली से लेकर गुन्नौर तक चलाईं गईं लेकिन अब फिर से बदायूं तक सवारियों को ढोया जा रहा है। इनका संचालन कराने वाले इतने शातिर हैं कि उन्होंने बसों का रंग भी रोडवेज बसों की तरह करा लिया है। बसों को परिवहन निगम की तरह ढालने की कोशिश की गई है। उन पर काम करने वाले बाकायदा टिकट मशीन का प्रयोग कर रहे हैं, और निगम के चालक-परिचालकों की तरह यूनिफाॅर्म भी पहन रहे हैं।
दिल्ली से लेकर बदायूं तक इन लोगों की पुलिस और परिवहन निगम के कुछ अधिकारियों से अच्छी सांठगांठ है। इससे इन बसों का लगातार संचालन हो रहा है। ऐसे में जब यात्री इन बसों में बैठ जाते हैं और बाद में उन्हें बस के प्राइवेट होने का पता चलता है तो वे भी बेबसी में कुछ नहीं कर पाते।
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एक सप्ताह पहले पकड़ी गईं थीं तीन फर्जी रोडवेज बसें
एआरटीओ प्रवर्तन अंबरीश कुमार ने एक सप्ताह पहले दिल्ली-बदायूं रूट से तीन फर्जी रोडवेज बसें पकड़ी थीं। उनमें एक बस के शीशे पर उत्तर प्रदेश और उसके ऊपर कौशांबी लिखा हुआ था। नीचे दिल्ली आनंद बिहार का बोर्ड भी लगा था। हालांकि उन्होंने तीनों बसों पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। बाद में इनके संचालक जुर्माना जमा करके बसों को ले गए और फिर से उनका संचालन शुरू करा दिया।
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जिले के कई स्थानों से रवाना होती हैं बिना परमिट की बसें
यह खेल केवल दिल्ली-बदायूं रूट पर ही नहीं हो रहा। ऐसी तमाम बसें जयपुर, हिमाचल और बड़े प्रदेशों या शहरों के लिए रवाना होती हैं। इन बसों के कादरचौक, मुजरिया, बिसौली, दातागंज, उसावां और शहर के खेड़ा नवादा इलाके में अड्डे हैं। यहां से रोजाना यह बसें सवारियों को लेकर आती-जाती हैं जबकि इन पर कोई परमिट नहीं होता है।
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दो दिन बाद चालाया जाएगा अभियान
जिन वाहनों को सीज किया जाता है। उन्हें नजदीकी थाने या पुलिस चौकी में खड़ा करा दिया जाता है और जिन वाहनों पर जुर्माना लगाया जाता है, अगर उनके चालक-परिचालक जुर्माना जमा कर देते हैं तो वाहनों को छोड़ दिया जाता है। जिन बड़े वाहनों का जुर्माना जमा नहीं होता है। उन्हें पुलिस चौकी या थाने में खड़ा भी कराया जा सकता है। वैसे केवल वाहन सीज होने की स्थिति में पुलिस को सौंपा जाता है। पिछले दो माह सावन के रहे थे। इस दौरान रूट डायवर्जन भी लागू रहा लेकिन अब डायवर्जन हट गया है। दो दिन बाद इन बसों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा। इनके खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी, तभी इनका संचालन बंद होगा। इस कार्रवाई का लोगों को असर भी देखने को मिलेगा।
– अंबरीश कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन


