बदायूं

Budaun News: नदी-नालों में बहाई जा रही शौचालयों की गंदगी

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Dirt from toilets being discharged into rivers and drains

नगर पालिका का बाइपास पर बना एफएसटीपी

बदायूं। शौचालयों के सेप्टिक टैंक से निकलने वाली गंदगी नदी-नालों में बहाई जा रही है। इससे गंदगी फैल रही है और नदियों का पानी दूषित हो रहा है। सेप्टिक टैंकों की गंदगी के निस्तारण के लिए जलनिगम ने फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) बनाकर तैयार किया था। इसे नगर पालिका को हैंडओवर भी कर दिया, लेकिन पालिका की उदासीनता के चलते यह अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इससे न सिर्फ मच्छर पनप रहे हैं, बल्कि संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका बनी हुई है।

खुले में शौच मुक्त अभियान (ओडीएफ) के तहत शासन ने व्यक्तिगत से लेकर सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। इससे लोगों के खुले में शौच जाने की आदत भी बदली। इससे सड़कों और खेतों किनारे से गंदगी कम होने लगी, लेकिन दूसरी तरफ लोगों के सामने दूसरी समस्या यह आने लगी कि सेप्टिक टैंक के भर जाने के बाद में उसे खाली कराने के लिए लोगों रकम खर्च करनी पड़ रही।

जो लोग सेप्टिक टैंक खाली कराते थे। वह मलबे को खाली जगह या फिर नदी, नालों में फेंक आते थे। इसकी गंदगी कम होने की जगह बढ़ने लगी। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने जिले में एफएसटीपी बनाने के लिए मंजूरी दी। वर्ष 2020 में कार्यदायी संस्था जलनिगम ने जमीन की तलाश की। करीब पौने चार करोड़ की लागत से एफएसटीपी बनाया जाना था।

शासन ने इसको पूरा करने का समय मार्च 2021 में रखा गया, लेकिन कभी बजट के अभाव में तो कभी मशीन नहीं मिल पाने के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। जुलाई, 2023 में जल निगम ने इसे बनाकर तैयार कर लिया और नगर पालिका को हैंडओवर कर दिया है, लेकिन तब से अब तक यह प्लांट शुरू नहीं हो सका है। इसकी वजह से अभी तक नाले-नालियों में यह गंदगी डाली जा रही है।

प्लांट शुरू करने के लिए चाहिए कर्मचारी

पालिका प्रशासन के अनुसार एफएसटीपी को शुरू करने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता है। जो वहां की मशीनों को तकनीकी तौर पर संचालित कर सके। इसके लिए एक फर्म निर्धारित की जाएगी। जो हमें कर्मचारी मुहैया करा सके। उसके बाद में इसको शुरू किया जाएगा। तभी शुल्क का निर्धारण किया जाएगा।

गंदगी से बनाई जाएगी खाद

शौचालयों के सेप्टिक टैंक भर जाने पर उसकी गंदगी को सक्शन पंप से एफएसटीपी भेजा जाएगा। वहां से वाहन उस मलबे को उन मशीनों में डाला जाएगा। इसके बाद में प्लांट में लगी मशीनों के माध्यम से उसकी जैविक खाद बनाई जाएगी। उस खाद को बेचकर नगर पालिका किसानों को बेचकर अपनी आमदनी बढ़ाएगी।

एफएसटीपी कुछ समय पहले ही हैंडओवर हुई, दो दिन पहले ही कर्मचारियों को भेजकर वहां की स्थिति दिखवाई थी। वहां पर काम करके के लिए एक फर्म को ठेका दिया जाएगा, जो उसका संचालन करेगी। -फात्मा रजा, पालिकाध्यक्ष


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