बरेली

ट्रेनों का हाल: स्लीपर में सामान्य बोगी जैसे हालात, गैलरी में गुजारी रात, टॉयलेट में खड़े-खड़े किया सफर

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sleeper coaches became general coaches due to heavy rush of passengers in trains

स्लीपर कोच की गैलरी में लेटे बच्चे, बैठे यात्री
– फोटो : अमर उजाला

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गर्मी की छुट्टियों में ट्रेनों पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ा हुआ है। हालात ये हैं कि बरेली होकर गुजरने वाली लंबी दूरी की ज्यादातर ट्रेनों में 20 जून तक क्षमता से 35 फीसदी तक ज्यादा टिकट बुक हैं। स्पेशल ट्रेनों में भी कंफर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं। यात्रा के दिन तक वेटिंग टिकटों में बमुश्किल पांच से सात फीसदी टिकट भी कंफर्म नहीं हो पा रहे। सोमवार रात कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट वाले यात्री कोच में सीटों के नीचे फर्श पर बैठकर और गैलरी में लेटकर यात्रा करते नजर आए। कई तो टॉयलेट में खड़े खड़े यात्रा करने को मजबूर रहे।

बरेली जंक्शन से होकर रोजाना अप-डाउन औसतन 80 से 90 ट्रेनें गुजरती हैं। लंबी दूरी की ज्यादातर ट्रेनों में स्लीपर के मुकाबले एसी कोच ज्यादा हैं। जंक्शन से रोजाना औसतन 25 से 30 हजार यात्री आते-जाते हैं। छुट्टियों का सीजन शुरू होने के साथ मई के पहले सप्ताह से ही ट्रेनों में भीड़ बढ़ने लगी थी। अब हालात ये हैं कि जनरल कोच को छोड़ भी दें तो आरक्षित स्लीपर कोचों में भी भीड़ के कारण यात्रियों का चढ़ना मुश्किल हो रहा है।

मुरादाबाद डिवीजन के कंट्रोल रूम को रोजाना कोच में क्षमता से अधिक और भीड़ के कारण टॉयलेट का दरवाजा बंद होने जैसी आठ से दस शिकायतें मिल रही हैं। कंफर्म टिकट के अलावा ज्यादातर यात्री वेटिंग टिकट के होने के कारण उनको कोच से उतारा भी नहीं जा सकता। लंबी दूरी की कई ट्रेनों में जुलाई के पहले सप्ताह तक वेटिंग आ रही है।


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