केसीएमटी केम्पस -2 में किया गया जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड पर चर्चा तथा मौन का आयोजन
जलियांवाला बाग बलिदानों की कहानी है , मर मिटेंगी कई कहानियां मगर इतिहास में जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड दर्द की निशानी है।
के॰सी॰एम॰टी॰ कैम्पस-२, फ़रीदपुर मार्ग , बरेली मे 13 अप्रैल के दिन अमृतसर के जलियाँवाला बाग में घटित हत्याकाण्ड पर एक चर्चा तथा 2 मिनट के मौन का आयोजन किया गया ।
जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास में एक कलंकित घटना है। अमृतसर के जलियांवाला बाग में जब एक भीड़ शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठी हुई थी, तो ब्रिटिश सरकार ने उस पर गोली चलवा दी थी। जिसमें अनेक निर्दोष और निहत्थे लोग मारे गए थे।

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ प्रवीण रस्तोगी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने बाले जलियांवाला बाग हत्याकांड के सभी महान शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए छात्रों को बताया कि यदि किसी घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला तो वह घटना एक जघन्य हत्याकांड था ,
जिसमें 1000 से अधिक लोग मारे गए तथा 2000 से अधिक लोग घायल हुए । तब हजारों भारतीयों ने जलियांवाला बाग की मिट्टी को माथे पर लगा कर देश को आजाद कराने का दृढ़ संकल्प लिया और कर दिखाया ।
डॉ संजीव कुमार शर्मा ने भी इस चर्चा में भाग लेते हुए छात्रों को इस हत्याकाण्ड से अवगत कराया तथा शहीदों को श्रद्धांजलि दी ।
चर्चा में महाविद्यालय कर समस्त शिक्षक उपस्थित रहे ।
गूंज रही थी चारदीवारी तब इंकलाब के नारों से ,
सहम उठा जब पूरा भारत,
डायर के अत्याचारों से ।
क्या बूढ़े , क्या बच्चे भोले , क्या महिलाएं दीवानी थी , जब जलियांवाले बाग में लिखी,
खूनी कलम ने कहानी थी ।


