पराली जलाने वालों के खिलाफ की होगी सख्त कार्रवाई : डीएम
गन्ना शोध संस्थान में हुआ कार्यशाला का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। गन्ना शोध संस्थान में पराली प्रबंधन के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें डीएम उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं प्रदेश में सबसे अधिक अपने जिले में हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने कहा कि जिले में पुवायां तहसील में सर्वाधिक पराली जलाने की घटनाएं होती हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि ग्राम एवं न्याय पंचायत स्तर पर किसानों को जागरूक किया जाए कि पराली न जलाएं।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के प्रभारी डॉ. एनससी त्रिपाठी और डॉ. एनपी गुप्ता ने पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
बताया कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी के लाभदायक जीवांश व मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरकता कम हो जाती है और फसल की पैदावार में भी कमी आती है। पराली को डिकम्पोजर की मदद से सड़ाकर एवं गलाकर उसको खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है।
सीडीओ एसबी सिंह ने समस्त सचिवों एवं ग्राम पंचायत अधिकारियों, लेखपालों को निर्देशित किया गया कि अपने क्षेत्र में पराली जलाने न दें। उप कृषि धीरेंद्र सिंह ने पराली न जलाने की अपील की। एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि पराली जलाने की घटना सेटेलाइट की मदद से पकड़ी जाती है और संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने पराली को गोशालाओं में देने की अपील की। एचसीपीएल प्रबंधक मृणाल कुमार सिंह ने बताया कि पराली को कृषि यंत्र बेलर का प्रयोग कर बेल्ड पराली को बायोगैस प्लांट बदायूं को भेजा जाए। इससे बायोगैस तैयार की जाती है। एफपीओ से मिलकर किसान पराली को बदायूं के प्लांट भेज सकते हैं। इसका किसानों को लाभ मिलेगा।
कार्यशाला में डीपीआरओ घनश्याम सागर, पीडी अवधेश राम, डीडीओ पवन सिंह, सभी तहसीलों के एसडीएम, ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल आदि मौजूद रहे।