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दिखाई देने लग गए रियल एस्टेट के ‘अच्छे दिन’, हाउसिंग सेक्टर के लिए अति भविष्य के ये 5 अलर्ट

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रियल एस्टेट सेक्टर ने हाल ही में कई मुश्किल सालों का सामना किया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस सेक्टर को एक के बाद एक कई संकेत मिले हैं। नोटबंदी, गज़ब, रेरा, कोरोना महामारी और रियल एस्टेट शेयरधारकों के डिफॉल्ट ने पूरे सेक्टर को लंबे समय तक परेशान किया। हालांकि अब ऐसा लग रहा है कि रियल एस्टेट सेक्टर के अच्छे दिन ज्यादा दूर नहीं रहे हैं। हाल के दिनों में सेक्टर के लिए हालात तेजी से अच्छे हैं।

नारेडको और पीएमजी इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रियल एस्टेट सेक्टर ग्रोथ के मजबूत संकेत दिखा रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर का आकार 200 बिलियन डॉलर का था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका आकार 2024-25 तक बढ़कर 1 डॉलर पर पहुंच सकता है। आइए जानते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर खासकर हाउसिंग को लेकर कैसे आशंका मिल रहे हैं…

ग्राहकों की मांग के रुझान (आवासीय मांग)

सबसे पहले देखने वाले के ग्राहक जानते हैं। पिछले साल रेसिडेंशियल रीयल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छा साबित हुआ था। साल 2022 के दौरान रेसिडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर में सेल्स का नया रिकॉर्ड बना। इस बिक्री के दौरान 68 विशिष्ट विवरण दर्ज किए गए। अच्छी बात यह है कि छोटे व मंझोले शहरों से अच्छी मांग निकलकर आने लगी है, जो बेहतर भविष्य का सबसे अच्छा संकेत है। बड़े शहरों का भी अच्छा है। एनारॉक की एक रिपोर्ट बताती है कि 2023 की पहली तिमाही के दौरान देश के सात बड़े शहरों में घरों की मांग 1.14 लाख यूनिट पर पहुंच गई, जो साल भर पहले 99,500 यूनिट रही थी। उसी रात फ्रैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि देश के 8 बड़े शहरों में पिछले वित्त वर्षों के दौरान घरों की बिक्री के 34 आंकड़े मिले हैं।

घरों का बढ़ता आकार (घर का आकार बढ़ता है)

एनारॉक की ही एक अलग रिपोर्ट बताती है कि देश में नए घरों की जो मांग आ रही है, वह बड़े घरों पर हावी है। पिछले पांच सालों के दौरान नए घरों का आकार 7 फीसदी बढ़ गया है। देश के सात बड़े शहरों में घरों का औसत आकार अब बढ़कर 1,225 वर्ग फुट हो गया है, जो 2018 में करीब 1,150 वर्ग फुट हो गया था।

विदेशी निवेश (विदेशी निवेश)

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए निवेश एक बड़ी समस्या बन गई थी, लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब इस मामले में भी परेशानी दूर होने वाली है। साल 2017 से 2022 के दौरान विदेशी निवेशकों ने इसमें 26.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 2.20 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है।

निवेश निवेश (पीई निवेश)

निवेश के मोर्चों पर एक और अच्छी खबर यह है कि एफडीआई के साथ-साथ शेयर निवेश भी बढ़ रहा है। इंटरनेशनल प्रॉपर्टी कंसल्टेंट सेविल्स के मुताबिक, साल 2022 के अंत तक इंडियन रियल एस्टेट सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट 3.4 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया था। इस तरह से COVID के बाद पहली बार शेयर निवेश इस स्तर पर है।

ब्याज दर (ब्याज दर)

पिछले एक साल के दौरान रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि की, जिसके बाद लगभग सभी बैंकों ने कमोबेश समान अनुपात में होम लोन महंगा कर दिया। व्यस्तता बढ़ने के बाद भी घरों की बिक्री में तेजी देखी जा रही थी। अब रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाने के क्रम को रोक रहा है। अप्रैल और जून 2023 में एमपीसी की बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखा गया है। इस आने वाले दिनों में बैंक लालच को कम कर सकते हैं। यह हाउसिंग सेक्टर के लिए वीकेंड का काम कर सकता है।

ये भी पढ़ें: अडानी इंटरप्राइज आज भी मजबूत, अडानी पावर को हुआ नुकसान, ऐसा रहा बाकी स्टॉक का हाल

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