औद्योगिक वृद्धि ने दिया झटका, नियंत्रण में बंधा, वृद्धि दर बेहतर रहने की उम्मीद
लोकतांत्रिक आर्थिक स्थिति के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था से हर कोई बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा है। हालांकि सूचना के आंकड़ों से पहले भारत को औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर झटका लगता है। अप्रैल में आठ प्रमुख प्रविष्टियां बढ़ने की दर में कुछ कमी आई है। वहीं दूसरी तरफ घाटा सरकार के सर्वे के दायरे में है।
इतना रहा घाटा
लापरवाही के आंकड़े जारी किए जाने से पहले योगों (राजकोषीय घाटे) के आंकड़े जारी किए गए थे। आंकड़ों के मुताबिक, शेयर सरकार का विलय पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में लेखांकन के 6.4 प्रतिशत के बराबर है। वित्त मंत्रालय के दृष्टिकोण रिपोर्ट में भी इसी तरह जीने का लक्ष्य रखा गया था। सीजीए (सीजीए) ने केंद्र सरकार के 2022-23 के आय-व्यय का पात्र जारी करते हुए कहा कि मूल्य के होश से बांधा 17,33,131 करोड़ रुपये रहा है। वित्त मंत्री निर्मल सितारामन (FMनिर्मला सीतारमण) ने एक फरवरी को आम बजट (बजट 2023) में 2023-24 में पेश किया है, जो राशि के 5.9 प्रतिशत पर सीमित करने का लक्ष्य रखा है।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल महीने के दौरान यह घाटा 1.34 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो पूरे साल की पसंद के 7.5 प्रतिशत के बराबर है। यह साल भर पहले यानी अप्रैल 2022 की तुलना में ज्यादा है। पिछले साल अप्रैल में पार्टनरशिप पूरे साल के 4.5 प्रतिशत के बराबर रही थी।
निर्धारण की वृद्धि ने झटका दिया
औद्योगिक उत्पादन की बात करें तो अप्रैल महीने में झटका लगा है। अप्रैल महीने के दौरान वर्षण पर आठ मुख्य त्रुटियों की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रही। इन मुख्य सूचियों के सूचकांक में मार्च महीने के दौरान 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वहीं वित्त वर्ष 2022-23 के आठ प्रमुख अंकों के दौरान 7.7 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई थी, जिसका साल भर पहले यानी 2021-22 के दौरान 10.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
सरकार ने वजह की ये आशा है
भारतीय उद्योग जगत के विरोधों में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही थी। फरवरी 2023 में जारी फिस्कल पोर्टफोलियो (फिस्कल पॉलिसी स्टेटमेंट) में कहा गया था कि वित्त वर्ष 2022-23 में नॉमिनल क्रेडिट रेटिंग की रेटिंग (नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ रेट) ब्लूप्रिंट आधार पर 15.4 प्रतिशत रह सकती है। साल भर पहले यानी 2021-22 में नॉमिनल स्कोर रेट 19.5 प्रतिशत रही थी। वहीं वास्तविक अनुमानित रेट (Real GDP ग्रोथ रेट) के 7 प्रतिशत रहने का अनुमान था, जो साल भर पहले 8.7 प्रतिशत रहा था।
रिजर्व बैंक का ये था रिपोर्ट
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास) ने ब्लूप्रिंट रिपोर्ट (आरबीआई वार्षिक रिपोर्ट) में कहा था कि पिछले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था (भारतीय अर्थव्यवस्था) की वृद्धि दर 7 फीसदी से कुछ ज्यादा रह सकती है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक जिन हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स (हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स) की निगरानी करता है, उनमें से करीब 70 ने संकेत दिए थे। सेंट्रल बैंक ने मार्च तिमाही के दौरान गठित रेटिंग 5.1 प्रतिशत रहने का रिपोर्ट दिया था।
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