होम लोन के चक्कर में धोखा देने के बाद अब ग्राहकों को क्या राहत मिलेगी? जानें
आरबीआई एमपीसी जून 2023 बैठक: वित्त वर्ष 2023-24 की शुरुआत लोगों के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। आज भारतीय रिजर्व बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की एक्सचेंज में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया। ऐसे में आरबीआई का रेपो रेट 6.5 प्रतिशत (RBI Repo Rate) पर स्थिर बना हुआ है। यह फैसला होम लोन लेने वालों के लिए राहत की खबर लेकर आया है। मई 2022 से लेकर अप्रैल 2023 तक होम लोन बायर्स ने पिछले 10 महीने में होम लोन के चक्कर में भारी जाल बिछाया है। इस वजह से ग्राहकों पर ईएमआई का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है। ऐमें में यह सवाल उठता है कि अप्रैल और जून में लगातार दो बार बैंक नीति नीति में स्थिरता इस बात का संकेत है कि क्या जल्द ही अपनी रेपो रेटिंग में चयन कर सकता है?
बेवजह में अटका हुआ बुरा असर
सब्सक्राइबर है कि जैसे-जैसे प्राधिकरण ने अपनी रेपो रेट में रेटिंग की है, वैसे-वैसे साइट्स ने भी अपने मार्जिनल कोस्ट ऑफ लैंडिंग रेट्स और नियर लैंडिंग रेटिंग्स में भी की है। इसका असर ग्राहकों की ईएमआई पर सीधे तौर पर पड़ा है। उदाहरण के तौर पर अगर आपने किसी बैंक से 40 लाख रुपये का लोन 20 साल के लिए लिया है तो उसका ब्याज दर 7 प्रतिशत था तो ऐसे में रेपो रेट में रेटिंग के बाद यह दर 9.5 प्रतिशत हो जाएगी। ऐसे में इस लोग पर आपको ब्याज दर के रूप में 34.4 लाख रुपये के बजाय 49.48 लाख रुपये का शुल्क देना होगा। ऐसे में आपके कुल डिजीज में 44 फीसदी तक का धोखा हुआ है। वहीं अगर आप बेरोजगारी के बोझ से परेशान होकर इस लोन को 20 के बजाय 30 साल तक बढ़ाने के लिए देते हैं तो आपको 81.08 लाख रुपये ब्याज के रूप में देना होगा। ऐसे में आपके कुल डिजीज में 136 प्रतिशत तक के कारण होंगे। इस कारण ही जानकार लोगों को कार्यकाल बढ़ाने के बजाय ज्यादा आवास देने की सलाह देते हैं।
क्या तय कम होगा रेपो रेट?
रिजर्व बैंक ने पिछले एक साल में रेपो रेट में पूरे 2.50 प्रतिशत का दोष लगाया है। एक्सएमएल द्वारा अपनाए गए सख्त विवरण के कारण यह जरूरी है। रिजर्व बैंक खुलासे दर को 2 से 6 फीसदी के बीच में लगाने की कोशिश कर रहा है। अप्रैल 2022 में देश में करीब 7.79 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया था। ऐसे में रिजर्व बैंक ने इसके बाद लगातार रेपो रेट में यादगार की है। अप्रैल 2023 में देश की झलक करीब 4.7 प्रतिशत पर आ गई है। ऐसे में यह 18 महीने में सबसे कम लीक का है। निर्देशांक रिपोर्ट है कि यह दर मई 2023 तक गिरकर 4 तक पहुंच सकती है। वहीं वित्त वर्ष 2023 में केंद्रीय बैंक का अनुमान लगभग 5.1 प्रतिशत रहने की अनुमान है। ऐसे में जानकारों का यह मानना है कि आने वाले दिनों में आरबीआई रेपो रेटेड में कारण पर विचार नहीं कर सकता है, लेकिन इसे कम करने के लिए वह प्रविष्टियों की पैनी नजर रखता है। रेपो रेट की बात कम होगी या नहीं यह केवल इस बात पर लगातार आएगा की आगे आने वाले वक्त में देश में दर्ज़ दर कितना रहता है।
होम लोन बायर्स पर क्या असर होगा?
रेपो रेट में स्थिरता निश्चित रूप से बायर्स के लिए बहुत अच्छी खबर है। इससे उन्हें आगे बढ़ने पर ब्याज दर से राहत मिलती है। ध्यान देने वाली बात ये है कि किसी बायर के हाथ में ज़ीज़ दर नहीं होती है, लेकिन अगर आपके लोगों का मंथन बढ़ रहा है, तो आप उसे सीमित करने के लिए अपने कार्यकाल को बढ़ाने की गलती नहीं करते हैं। इसके बजाय आप ज्यादा ईएमआई ही दे सकते हैं क्योंकि इससे आपको लोन पर ज्यादा माइलेज का भुगतान मिलेगा।
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