ईश्वर को कहीं बाहर खोजने की जरूरत नहीं : जितेंद्र
तिलहर। आर्य समाज में आयोजित वैदिक गोष्ठी में आचार्य जितेंद्र आर्य ने कहा कि परमपिता परमात्मा सतचित आनंद स्वरूप है। उसे प्राप्त करने के लिए उसके गुणों को धारण करना होगा, तभी उसके समीप पहुंचा जा सकता है। उसका हृदय में वास होने के कारण उसे कहीं बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं है।
इस अवसर पर पं. उदित आर्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा रचित ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका तथा सत्यार्थ प्रकाश को पढ़कर सुनाते हुए सभी से वेदों के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। पं. गिरीश चंद्र शर्मा ने ‘ओम है जीवन हमारा’ भजन सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ के साथ हुआ। समापन पर पूर्व प्राचार्य सुनीति शर्मा के निधन पर सभी ने दो मिनट का मौन रखते हुए दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर ओम शंकर, प्रधान वेदप्रकाश आर्य, दासीराम आर्य, रविंद्र आर्य, कृष्ण मुरारी, लोकेश कुमार, नन्हेंलाल, विष्णु पाल आदि मौजूद रहे।