NRI Murder Case: इससे भयावह क्या होगा जब पत्नी ही काट दे गला… सजा सुनाते वक्त कोर्ट ने की टिप्पणी

रमनदीप कौर और मिट्ठू
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शाहजहांपुर के बहुचर्चित सुखजीत सिंह हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव ने एनआरआई पत्नी रमनदीप कौर को फांसी और उसके प्रेमी गुरुप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा की घोषणा करते हुए रमनदीप के अपराध को गुरुप्रीत सिंह उर्फ मिट्ठू से ज्यादा गंभीर माना है।
अदालत ने टिप्पणी की है कि पढ़ी-लिखी और संपन्न परिवार से होने के बावजूद केवल अपने अनैतिक संबंधों को बढ़ाने के लिए रमनदीप ने अपने उस पति का बेरहमी से कत्ल कर दिया जिससे उसे दो बच्चे थे। इस वजह से रमनदीप कौर का मामला विरल से विरलतम श्रेणी में आता है। जबकि मिट्ठू का मामला इस श्रेणी में नहीं आता।
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अदालत ने अपने फैसले में महात्मा गांधी और एंटोन चेखों के उन उद्गार का हवाला दिया जिसमें फांसी की सजा का विरोध किया गया है। अदालत ने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियां अलग थीं तब लोगों में प्रेमभाव था और इंसानियत जिंदा थी। आज के समय में मनुष्य के पास सबकुछ होते हुए भी उसके हृदय में क्रूरता, लालच और अमानवीयता ने जगह ले ली है।
इस मामले में केवल अपने अनैतिक संबंधों के लिए गुरुप्रीत और रमनदीप ने सुखजीत की जान ले ली। अदालत ने कहा कि केवल सुखजीत की हत्या नहीं हुई, विधवा मां के बुढ़ापे के सहारे की हत्या हुई, उसके दोनों बेटों के बचपन और उनकी खुशियों की हत्या हुई। यह हत्या किसी आवेश में आकर नहीं की गई बल्कि केवल अपनी वासना की पूर्ति के लिए सुनियोजित ढंग से की गई।