परशुरामपुर गोआश्रय स्थल : 16 गोवंश की मौत के बाद शुरू हुई जांच
कलीनगर। परशुरामपुर गोआश्रय स्थल में लगातार हो रही गोवंश की मौत के मामले के तूल पकड़ने पर प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। अब तक सच पर पर्दा डालने में जुटा प्रशासन अब मामले की जांच कराने के लिए तैयार है। एसडीएम कलीनगर आशुतोष गुप्ता ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है। जांच में पांच बिंदुओं को जांच किया गया है।
माधोटांडा के मौजा परशुरामपुर स्थित गोआश्रय स्थल में एक के बाद एक 16 गोवंश की मौत का मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने सच्चाई जानने के बजाय इसे झुठलाने के प्रयास किए, लेकिन लगातार हो रही गोवंश की मौत ही सच्चाई सामने लाने के लिए काफी थी। हद तो यह है कि निरीक्षण के बाद सीवीओ ने अधिकारियों को सौंपी रिपोर्ट में सब कुछ ठीक बताया था। एक गोवंश के बीमार होने का दावा किया था, लेकिन उनके निरीक्षण कर लौटने के 24 घंटे के अंदर ही दो पशु मर गए।
सीवीओ के निरीक्षण के बाद से अब तक छह गोवंश की और मौत हो गई। लगातार हो रही गोवंश की मौत के बाद जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारियों को जवाब देते नहीं बन रहा है। अब उन्हें यह डर सता रहा है कि अगर शासन स्तर से जांच हुई तो वे क्या जवाब देंगे। एसडीम आशुतोष गुप्ता ने बृहस्पतिवार को मामले में जांच के निर्देश देते हुए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। इसमें तहसीलदार के अलावा बीडीओ पूरनपुर और पशु चिकित्सक माधोटांडा को शामिल किया गया है। जांच में 15 जुलाई से वर्तमान तक संरक्षित गोवंश की संख्या व उसके सापेक्ष गोवंश की मृत्यु की संख्या को शामिल किया गया है। मृत्यु का कारण व मृत्यु की सूचना उच्च अधिकारियों को दिए जाने के अलावा निस्तारण की कार्रवाई के साथ अन्य स्थानों से गोवंश लाने की स्थिति को भी शामिल किया गया है।
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जो पहले क्लीनचिट दे चुके, वहीं फिर करेंगे जांच
गोआश्रय स्थल में लगातार हो रही गोवंश की मौत के मामले में भले ही एसडीएम ने सच्चाई जानने के लिए जांच समिति का गठन कर दिया हो, लेकिन तहसीलदार को छोड़ शेष दोनों जांच अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचने के लिए पहले अपनी जांच में आश्रय स्थल की सच्चाई पर पर्दा डाल चुके हैं। गोवंश की मौत के मामले को जो छिपाते रहे, वे अब सच्चाई सामने लाएंगे, इसकी उम्मीद कम ही है।
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दो केयरटेकर और बढ़ाए
आश्रय स्थल का मामला सुर्खियों में आने के बाद व्यवस्थाओं में कुछ सुधार होने लगा है। पशु चिकित्सक डॉ. नूरुल हुदा ने बताया कि आश्रय स्थल पर गोवंश की देखरेख के लिए दो केयरटेकर और बढ़ा दिए हैं। अब केयरटेकर की संख्या चार हो गई है। इसके अलावा दो दिन पूर्व तीन ट्रॉली भूसा गोआश्रय स्थल पर भेजा गया है। पौष्टिक आहार के लिए मूंगफली के पौधों के गट्ठे भी मंगवाए जा रहे हैं।