पीलीभीत

Pilibhit News: सहकारी गन्ना विकास समिति बनवाएगी नेत्र चिकित्सालय

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Cooperative Sugarcane Development Society will make eye hospital

पूरनपुर सहकारी गन्ना समिति में हुई एजीएम में हंगामा करते डेलीगेट । संवाद

पूरनपुर। सहकारी गन्ना समिति की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक में नेत्र चिकित्सालय बनवाने समेत कई प्रस्ताव पास हुए। कई बिंदुओं पर समिति के पूर्व अध्यक्षों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने पर जमकर हंगामा हुआ। चीनी मिलों को गन्ना क्षेत्र आरक्षित करने और किसानों के गन्ना भुगतान से कटौती के प्रस्ताव पर संचालकों ने मंच के नजदीक पहुंचकर हंगामा किया।

चीनी मिलों को गन्ना क्षेत्र आरक्षित करने के प्रस्ताव पर पहले सर्व सम्मति से पिछले साल की तरह ही गन्ना की आपूर्ति करने का प्रस्ताव पास होने की घोषणा की गई। इस पर डेलीगेटों का गुस्सा फूट पड़ा। हंगामा कर रहे डेलीगेटों का कहना था कि जब पूर्व संचालकों, अध्यक्षों को अपनी ही बात रखनी थी तो सामान्य निकाय की बैैठक ही क्यों बुलाई गई है।

इसे लेकर आपस में आरोप-प्रत्यारोप और नोकझोंक होने से बैठक तमाशा बन गई। आखिर में गन्ना क्षेत्र आरक्षित करने के मुद्दे पर विधायक बाबूराम पासवान ने स्थिति संभाली। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रस्ताव पर सदन की सहमति ही सर्वोपरि होती है। डेलीगेट गन्ना क्षेत्र आरक्षित करने के प्रस्ताव पर अपना मत लिखकर दें। उसके बाद ही इस पर निर्णय होगा। बैठक की अध्यक्षता कर रहे पूर्व चेयरमैन मोहन सिंह ने गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के लिए पूर्व में किसानों से हो रही कटौती को दोबारा शुरू कराने की बात कही। इसका पूर्व चेयरमैन श्रीकांत सिंह ने विरोध किया। किसानों ने भी कटौती पर जमकर हंगामा किया। इस मुद्दे पर विधायक ने कटौती के पक्ष और विपक्ष में मत के लिए डेलीगेटों से हाथ उठवाए। अधिकांश डेलीगेट कटौती न करने के पक्ष में थे। इस पर कटौती का प्रस्ताव पास नहीं हुआ।

इसके अलावा समिति बजट वर्ष 2023-24 की स्वीकृति, संतुलन पत्र के अनुमोदन, समिति भवन एवं खाद गोदामों की रंगाई-पुताई कराने, समिति के जर्जर पुराने भवन के स्थान पर नये भवन निर्माण कराकर सीतापुर आंख अस्पताल खोलने, समिति कार्यालय परिसर में किसान भवन का निर्माण कराने आदि प्रस्ताव पास किए गए। संचालन सहकारी समिति सचिव आरपी कुशवाहा और अनिल शुक्ला ने किया। इस दौरान पूर्व चेयरमैन लक्ष्मीकांत भारद्वाज, पूर्व संचालक हरदेव सिंह, स्वदेश सिंह यादव, सतेंद्र सिंह, ज्ञानेंद्र गुप्ता ज्ञानी, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक संजय श्रीवास्तव आदि ने विचार रखे।


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