Pilibhit News: जिला अस्पताल में नहीं हड्डी रोग विशेषज्ञ, प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे दिव्यांग

जिला दिव्यांग पुर्नवास केंद्र के बाहर बैठे लोग । संवाद
पीलीभीत। दिव्यांगों के लिए सरकार कई लाभकारी योजनाएं चला रही है। उन्हें किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए अफसरों को दिशा निर्देश भी दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद यहां दिव्यांग प्रमाणपत्र के लिए भटक रहे हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ न होने से हर सोमवार को दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में लगने वाले कैंप में प्रमाणपत्र बनवाने आने वालों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने से पहले हर सोमवार को बरातघर के पीछे बने आदर्श दिव्यांग पुनर्वास केंद्र पर कैंप का आयोजन होता है। यहां ऑनलाइन आवेदन करने के बाद दिव्यांग परीक्षण के लिए आते हैं। नाक-कान-गला के अलावा हड्डी रोग विशेषज्ञ दिवांगता का परीक्षण कर रिपोर्ट देते हैं। इस रिपोर्ट के बाद ही सीएमओ कार्यालय से दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सक्सेना के पास सीएमएस की जिम्मेदारी है। शासन ने मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंप दी है। ऐसे में वह कैंप में नहीं पहुंच पा रहे हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर एसीएमओ डॉ. केके जौहरी को कैंप की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन वह जून में सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद व्यवस्था फिर पटरी से उतर गई है। करीब दो माह से कैंप में हड्डी संबंधी दिव्यांगता का परीक्षण नहीं हो पा रहा है।
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हालत देखकर बिना जांच के ही मान लिया जाता है पात्र
हड्डी रोग विशेषज्ञ के न होने कारण जांच के दायरे में आने वालों को वापस कर दिया जाता है। इसमें जो देखने से ही पात्रता की जद में आता है उसको पास कर दिया जाता है। आवेदन सीएमओ कार्यालय को भेज दिया जाता है। ऐसा करीब दो माह से चल रहा है। इसके अलावा परीक्षण की जद में आने वालों को मात्र एक्स रे लिखा जाता है। यदि वह सीएमएस के पास खुद चला जाए तो उसकी जांच संभव हो जाती है।
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सौ से सवा सौ लोग आते हैं हर सोमवार को
हड्डी से संबंधित दिव्यांग व्यक्ति हर सोमवार को सौ से सवा के आस पास आते हैं। इसके अलावा अन्य समस्याओं से ग्रसित लोग आते हैं। नाक, कान और गले की बीमारी के लोगों का परीक्षण करा दिया जाता है। शेष को जांच के लिए बरेली भेज दिया जाता है।
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जिला अस्पताल में हड्डी के चिकित्सक मौजूद हैं। उनको जिम्मेदारी निभाना चाहिए। फिलहाल समस्या है। इसको लेकर शासन को चिट्ठी लिखकर व्यवस्था कराने की मांग की जाएगी।- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ