Pilibhit News: जल्द शुरू न किए बाढ़ नियंत्रण कार्य तो फिर तबाही मचाएगी शारदा नदी

नोमैंस लैंड पर शारदा नदी द्धारा किया गया कटान । संवाद
कलीनगर। शारदा नदी के खतरे वाले इलाकों में बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू न होने से सीमावर्ती गांव के लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि सिंचाई विभाग की ओर से समय से बाढ़ नियंत्रण के ठोस कार्य नहीं कराए तो आगामी बरसात में भी नो मैंस लैंड से लेकर कई क्षेत्रों में नदी भारी तबाही मचा सकती है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र में भारत नेपाल सीमा के अंतरराष्ट्रीय पिलर संख्या 21 से लेकर 29 तक का क्षेत्र बाढ़ को लेकर संवेदनशील माना जाता है। हर साल शारदा नदी क्षेत्र में नुकसान पहुंचाती है। अंतरराष्ट्रीय पिलर नंबर 17 और 19 तक जगबूड़ा और सनेडी नदी का भी खतरा बना रहता है। सिंचाई विभाग की शारदा सागर खंड और दूसरा बाढ़ खंड बाढ़ कार्यों की जिम्मेदारी संभालते हैं।
नौजल्हा क्षेत्र निवासी अरुण भंडार, अजीत समेत ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए कभी समय से सिंचाई परियोजना नहीं बनाई जाती है। देरी से काम शुरू किया जाता है। आपाधापी में कार्य होने से क्षेत्र की मजबूती नहीं हो पाती। पिछली आरिश में भी अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर 21 से लेकर शारदा नदी तक जगबूड़ा और शारदा ने काटन कर कटान किया था। अंतिम समय में अस्थायी बाढ़ नियंत्रण कार्य कर खानापूरी की गई।
बिजुरी खुर्द कला का जंगल बचाना भी चुनौती
पिछली बरसात में शारदा नदी ने रमनगर और बिजुरी खुर्द कला के बीच में बिजोरी खुर्द कला के जंगल को काटकर पूर्व में कराए गए बाढ़ नियंत्रण कार्य के भीतर घुसने का प्रयास किया था। ऐसे में इस क्षेत्र में ठोस कार्य जरूरी माना जा रहा है। बड़ा नुक्सान होने के बाद भी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए।
वर्जन
शारदा नदी पर बाढ़ नियंत्रण कार्य करने के लिए एस्टीमेट बनाए जा रहे हैं। ऐसी कोशिश की जा रही है कि समय से बजट मंजूर होते ही कार्य शुरू कर दिए जाएं। ताकि आगामी वर्षा ऋतु में अधिक नुकसान न हो सके। -ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड पूरनपुर