Pilibhit News: कहीं कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी की चपेट में तो नहीं बाघिन

रेस्क्यू से पूर्व दीवार पर सिर रखकर लेटी बाघिन। संवाद
कलीनगर(पीलीभीत)। अटकोना गांव में किसान की दीवार पर 11 घंटे तक शांत बैठने की घटना को विशेषज्ञों ने गंभीर माना है। उन्होंने आशंका जताई है कि बाघिन कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी से पीड़ित हो सकती है।पुष्टि के लिए बाघिन का ब्लड सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजा गया है।
अटकोना गांव में सुखविंदर सिंह के घर में घुसी बाघिन का स्वभाव खासा शांत था। भीड़ के बीच 11 घंटे तक रुकने के दौरान बाघिन के हमलावर तो दूर तेज दहाड़ लगाने तक की स्थिति देखने को नहीं मिली थी। लोग उससे 10-15 मीटर दूर खड़े होकर फोटो-वीडियो बनाते रहे, कुछ तो सेल्फी भी ले रहे थे। कुछ देर घूमने के बाद बाघिन दीवार पर ही सिर रखकर बैठी रही। ऐसे में उसके बीमार होने का अंदेशा जताया जा रहा था।
हालांकि अधिकारी इसे बाघिन का सामान्य स्वभाव बता रहे हैं, लेकिन वन विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जताई है। बाघों के स्वास्थ्य पर काम कर रहे विशेषज्ञ अनिल नायर का कहना है कि उम्र कम होने का बाघ और बाघिन के स्वभाव पर असर होता है, लेकिन अटकोना गांव में बाघिन की स्थिति देख उसके बीमार होने की ओर इशारा कर रही है। स्वभाव देख कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी के लक्षण भी प्रतीत हो रहे हैं। यह बीमारी मृत पशुओं के शव को कुत्तों के खाने के बाद बाघ के खाने से होती है। पुष्टि के लिए बाघिन की जांच करने की जरूरत है ताकि जंगल के अन्य बाघों को सुरक्षित किया जा सके। इधर, रेस्क्यू के दौरान मौजूद अफसर बाघिन के स्वभाव को सामान्य बता रहे हैं, लेकिन गेस्ट हाउस ले जाने के बाद परीक्षण में बाघिन सुस्त नजर आई। अधिकारियों के निर्देश पर अब बाघिन का ब्लड सैंपल लेकर आईवीआरआई भेजा गया है।
दो माह से छुट्टा पशुओं को ही खा रही थी बाघिन
जिस बाघिन को अटकोना गांव से रेस्क्यू किया गया वह दो माह से छह गांवों की सीमा में घूम रही थी। आबादी के निकट छुट्टा पशुओं को मारकर खा रही थी। पिपरिया संतोष गांव के निकट पहले से मृत पड़े दो मवेशियों को खाने की घटना भी सामने आ चुकी थी। मवेशियों के शव को कुत्तों ने भी खाया था। बीमारी के पीछे यह भी वजह बन सकता है।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर
कैनाइन डिस्टेंपर बीमारी को हार्डपैड रोग भी कहा जाता है। यह एक वायरल बीमारी है, जो विभिन्न प्रकार के जानवरों को प्रभावित करती है। इसमें घरेलू और जंगली प्रजातियां भी शामिल हैं। कुत्तों, कोयोट्स, पांडा, भेड़िये, बड़ी बिल्लियों आदि प्रजातियों में यह रोग हो सकता है। इसमें जानवरों की आक्रामकता और सक्रियता प्रभावित होती है।
गेस्ट हाउस में निगरानी में रखी गई बाघिन
बाघिन को माला गेस्ट हाउस में ही निगरानी में रखा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उसको छोड़ने की प्रक्रिया पर अमल किया जाएगा। अभी पशु चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार ही बाघिन की देखरेख कर रहे हैं। उसको नियमानुसार खाना और पानी दिया जा रहा है। बुधवार सुबह उसने दिया हुआ मांस भी खाया।