Pilibhit News: नाला टूटने के लिए गांव वालों को बताया दोषी, ठेकेदार को क्लीनचिट
बीसलपुर। चार दिन में ही बह गए 80 लाख से बने नाले का नहर विभाग की टीम ने शुक्रवार को गांव भोगापुर जाकर निरीक्षण किया। टीम ने नाला टूटने का दोष गांव वालों के सिर मढ़ दिया। ठेकेदार को क्लीनचिट दे दी। ग्रामीणों को नाले का दोबारा निर्माण कराने का आश्वासन दिया।
नहर विभाग ने गांव भोगापुर में खेतों तक सिंचाई के लिए सुगमता से नहर का पानी पहुंचाने के लिए करीब तीन माह पूर्व 80 लाख रुपये की लागत से 300 मीटर पक्के नाले का निर्माण कराया था। चार दिन पहले नाले में नहर से पानी छोड़ा गया, तो बृहस्पतिवार को नाले का करीब 20 मीटर हिस्सा टूटकर पानी के साथ बह गया।
ग्राम प्रधान लड़ैती देवी ने इसकी सूचना दी, लेकिन नहर विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेना तक मुनासिब नहीं समझा। नहर से नाले में छोड़ा जा रहा पानी भी बंद नहीं कराया। इससे पानी बेकार बहता रहा। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में 80 लाख से बने नाले के चार दिन में ही बह जाने का प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया, तब नहर विभाग की नींद टूटी।
नहर विभाग की टीम ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर मौका मुआयना किया। टीम ने सबसे पहले नहर से पानी बंद कराया। मौके पर फोटोग्राफी भी की। टीम ने ग्रामीणों से भी इस बारे में पूछताछ की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने बेहद घटिया स्तर की निर्माण सामग्री का प्रयोग किया है। गुणवत्ता और मानकों की निर्माण में पूरी तरह अनदेखी की गई है, इससे नाला टूटा है। टीम के ग्रामीणों को टूटा नाला शीघ्र बनवाने का आश्वासन दिया।
नहर विभाग के सहायक अभियंता विशाल मिश्रा ने बताया कि जांच पड़ताल में सामने आया है कि गांव वाले नहर से क्षमता से अधिक पानी नाले के जरिये अपने खेतों में ला रहे थे। नाले में पशुओं को भी घुसा देते थे। इस वजह से ही नाला क्षतिग्रस्त हुआ है। जहां तक निर्माण में घपले का सवाल है तो नाले का निर्माण मानक के अनुरूप हुआ है। इसमें ठेकेदार की कोई गलती नहीं है।
सहायक अभियंता ने कहा कि 15 दिन पहले ही उन्होंने गांव वालों से नहर से नाले से सीमित मात्रा में पानी छोड़ने के लिए कहा था। यह भी हिदायत दी थी कि नाले में पशुओं को न घुसाएं, लेकिन गांव वालों ने इस पर अमल नहीं किया। इसका नतीजा नाले के क्षतिग्रस्त होने के रूप में सामने है।