Rampur Kartoos Kand: दस साल की सजा सुनते ही दोषियों के हलक सूखे, मुंह छुपाकर कोर्ट से निकले..परिजन पीछे-पीछे

रामपुर में कोर्ट से बाहर आते कारतूस कांड के दोषी
– फोटो : संवाद
विस्तार
रामपुर के चर्चित कारतूस कांड की शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सभी दोषियों के आंखें में डर साफ दिखाई दे रहा था। जब कोर्ट ने सभी को दस साल कैद की सजा सुनाई तो उनके हलक सूख गए। सभी एक पल के लिए अपनी जगह पर ठहर गए। कोर्ट ने 13 साल की सुनवाई और नौ गवाहों को सुनने के बाद 24 दोषियों को दस-दस साल की कैद और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रताप सिंह मौर्य ने बताया कि सीआरपीएफ हवलदार विनोद कुमार और वीनेश कुमार को आर्म्स एक्ट में अतिरिक्त सात-सात साल की सजा और दस-दस हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। इससे पहले कोर्ट ने बृहस्पतिवार को सभी आरोपियों को दोषी करार दे दिया था। इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
कारतूस कांड में सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी मुंह छुपाकर कोर्ट से बाहर निकले। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इन सभी को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल ले जाया गया। कारतूस कांड में बृहस्पतिवार के बाद शुक्रवार को फैसले की घड़ी थी। दोहपर को सभी आरोपी कोर्ट पहुंच गए थे।
चेहरे पर तनाव था और उनके चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थीं। दोपहर करीब एक बजे कोर्ट ने सभी को सजा सुनाई। इसके बाद उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट का आदेश सुनते ही आरोपी सकते में आ गए।
पुलिस उन्हें कोर्ट से कड़ी सुरक्षा के बीच बाहर लेकर निकली तो सभी आरोपियों ने अपने चेहरे कपड़ों से छुपा लिए थे। पुलिस उन्हें आनन-फानन में गाड़ी में बैठाकर जेल ले गई। मीडिया के कैमरों से बचने का यह लोग प्रयास करते हुए नजर आए।
अभियोजन की ओर से केस को मजबूत तरीके से पेश किया गया था। नौ गवाहों को अभियोजन ने पेश किया और कोर्ट में सभी आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग रखी थी जिसे कोर्ट ने मंजूर भी कर लिया है। सभी आरोपियों को दस-दस साल की सजा सुनाई गई है। – प्रताप सिंह मौर्य, एडीजीसी
हाईकोर्ट ने दिए थे केस शीघ्र निस्तारण के आदेश
जमानत के लिए जब सभी आरोपी कोर्ट पहुंचे थे तब हाईकोर्ट ने जमानत तो मंजूर कर ली थी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्थानीय कोर्ट को इस केस का शीघ्र निस्तारण करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद इस केस की सुनवाई तेज हुई।
खुलासे के तीन साल बाद कोर्ट में शुरू हुई थी सुनवाई
29 अप्रैल 2010 को कारतूस कांड का खुलासा हुआ था और उसके बाद पुलिस ने लंबी तफ्तीश की। तफ्तीश के बाद पुलिस ने मामले की चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद 22 अगस्त 2013 को कोर्ट ने मामले को संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की। पहला गवाह 22 अगस्त 2013 को पेश हुआ था। आखिरी गवाही 29 सितंबर 23 को बचाव पक्ष ने पेश करके गवाही बंद कर दी।
आईजी की सख्ती के बाद हरकत में आई थी रामपुर पुलिस
कारतूस कांड की पैरवी को लेकर कुछ समय तक स्थानीय पुलिस ने भी सुस्ती दिखाई थी। कई दफा केस की सुनवाई अभियोजन की ठीक पैरवी की वजह से नहीं हो पा रही थी। कुछ साल पहले जब रमित शर्मा मुरादाबाद के आईजी बने तब उन्होंने केस में धीमी पैरवी को लेकर रामपुर पुलिस से नाराजगी जाहिर की थी। साथ ही आईजी ने इस पर सख्ती दिखाते हुए पुलिस को इस मामले में पैरवी तेज करने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद पुलिस ने पैरवी तेज कर दी थी।