Rampur News: मां और बच्चे दोनों के लिए वरदान है स्तनपान
रामपुर। मां का दूध बच्चे के लिए अमृत से कम नहीं है। इसके बाद भी महिलाएं भ्रांतियों के चलते अपने बच्चे को स्तनपान नहीं कराती हैं। मां की बदलती सोच बच्चे के स्वास्थ्य पर असर डालती है। डॉक्टर जन्म के बाद बच्चों को मां का दूध पिलवाते हैं। इसके बाद भी कम से कम छह माह तक बच्चे को मां का दूध पिलाना चाहिए। यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद रहता है। साथ स्तनपान कराने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर की संभावना भी कम हो जाती है। यह कहना है कि सीएमएस डॉ. अभिलाषा मिश्रा का।
मंगलवार यानी आज से विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो रही है। विश्व स्तनपान दिवस है। जिसमें महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा आशाएं और आंगनबाड़ी गांवों में जाकर कोरोना के साथ-साथ स्तनपान के प्रति जागरूक करेंगी। डॉक्टरों की मानें तो अधिकांश माताएं कुछ दिन बाद ही बच्चे को अपना दूध पिलाना बंद कर देती हैं। वह बच्चे को या तो बाजार का डिब्बा बंद दूध देना शुरू कर देती हैं या फिर गाय या भैंस के दूध से काम चलाती हैं, जबकि बच्चे को पैदा होने के छह माह तक स्तनपान कराना चाहिए।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अभिलाषा मिश्रा ने बताया कि बच्चे को जन्म से कम से कम छह माह तक मां का दूध पिलाना चाहिए, जिससे बच्चे को पर्याप्त पोषक तत्व मिल जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्तनपान को लेकर सात अगस्त तक अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। अस्पताल में आने वाली मां को जागरूक किया जाएगा।
स्तनपान के यह हैं लाभ
-बच्चे को डायरिया जैसे रोग की संभावना कम हो जाती है।
-मां के दूध में मौजूद तत्व बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
-स्तनपान कराने से मां व बच्चे के मध्य भावनात्मक लगाव बढ़ता है।
-मां का दूध न मिलने पर बच्चे में कुपोषण व सूखा रोग की संभावना बढ़ जाती है।
-स्तनपान से मां को स्तन कैंसर की संभावना भी कम हो जाती है।
-मां का दूध पीने वाले बच्चे का तेजी से विकास होता है।