Rampur News: कोर्ट कार्यालय में महिला की हत्या में 30 साल बाद पूर्व प्रधान बरी

रामपुर। कोर्ट कार्यालय में महिला की सरेआम गोली मारकर हत्या करने के 30 साल पुराने मामले में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में पूर्व प्रधान को बरी कर दिया। हत्या के दोषी महिला के भाई की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। उसे कोर्ट ने पहले ही उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
हत्या की यह वारदात जिला अदालत में 20 अगस्त 1993 को हुई थी। मिलक कोतवाली क्षेत्र के कूप गांव निवासी सत्यवती कोर्ट कार्यालय में कुर्सी पर बैठी थीं। आरोप है कि मृतका का सगा भाई राजकुमार और पूूर्व प्रधान शिशुपाल सिंह कोर्ट दफ्तर पहुंचे और उन्होंने लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर सत्यवती की हत्या कर दी। घटना की रिपोर्ट कोर्ट मोहर्रिर सत्यपाल सिंह ने सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराई थी। पुुलिस ने मौके से दोनाली बंदूक बरामद की थी।
बाद विवेचना कर पुलिस ने राजकुमार के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने अभियोजन के प्रार्थना पत्र पर शिशुपाल को भी विचारण के लिए तलब किया। अभियोजन की ओर से वादी मुकदमा समेत पांच गवाहों के बयान दर्ज कराए और आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता रमेश बाबू गुप्ता ने तर्क दिया कि पुलिस ने घटना में प्रयुक्त हथियार को कोर्ट में पेश नहीं किया और न ही आरोपी को एफआईआर में नामजद किया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने घटना के तीस साल बाद पूर्व प्रधान शिशुपाल को हत्या का आरोप साबित न होने पर बरी कर दिया। हत्या की वजह पुरानी रंजिश बताई गई थी।
सजा को चुनौती देने के बाद मुख्य आरोपी की हो गई मौत
कोर्ट ने मामले में सत्यवती के सगे भाई राजकुमार को हत्या का दोषी मानते हुए 16 अक्तूबर 2007 को आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अदा करने की सजा सुनाई थी। अधिवक्ता रमेश बाबू गुप्ता के मुताबिक राजकुमार ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। इस दौरान राजकुमार की मौत हो गई थी।