Rampur News: सरकारी अस्पतालों की भी फायर एनओसी नहीं
रामपुर। जिले के सरकारी अस्पतालों में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां किसी भी सरकारी अस्पताल के पास फायर ब्रिगेड की एनओसी नहीं है। अग्निशमन विभाग कई बार स्वास्थ्य अफसरों को पत्र लिखकर अग्निशमन यंत्र लगवाने और एनओसी के लिए अवगत करा चुका है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सुध नहीं है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1200 रोगी आते हैं। इमरजेंसी में 80-100 रोगी हर रोज पहुंचते हैं। वार्ड में भर्ती प्रत्येक रोगी के साथ तीन से चार तीमारदार भी सुबह से शाम तक रहते हैं। इसके अलावा 30-30 बेड के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी रोगियों की प्रतिदिन भीड़ लगी रहती है। हैरानी इस बात की है कि इनमें से किसी भी अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को तो बढ़ाया गया, लेकिन आग से बचाव के इंतजामों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। अग्निशमन विभाग की ओर से समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण कर जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस भेजकर मानकों को पूरा करने को कहा भी गया। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने कोई प्रयास नहीं किया।
120 निजी अस्पतालों और 10 लैब संचालकों के पास है एनओसी
स्वास्थ्य विभाग में 190 निजी अस्पताल, क्लीनिक और नर्सिंगहोम का पंजीकरण है। इनमें सिर्फ 120 के पास ही एनओसी है। वहीं पंजीकृत 18 पैथोलॉजी लैब में से सिर्फ 10 के पास दमकल विभाग की एनओसी है। कई निजी अस्पताल ऐसी जगह स्थित हैं, जहां अग्निशमन वाहन भी नहीं पहुंच सकते।
अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने के ये हैं मानक
दमकल अफसरों के अनुसार भवन का नक्शा पास होना चाहिए। निर्माण से पहले ऑनलाइन आवेदन कर विभाग की प्रोविजनल एनओसी ली जानी चाहिए। भवन तैयार होने के बाद व संचालन से पहले फाइनल एनओसी दी जाती है। क्षेत्रफल के हिसाब से छत पर टैंक, उस पर एलपीएम का पंप, फायर इंस्टीग्यूशर, प्रत्येक फ्लोर पर हौजरील, मैनुअल फायर अलार्म सिस्टम, धुआं निकालने के लिए एग्जॉस्ट फैन, भवन में न्यूनतम दो जीने अनिवार्य हैं।
बचाव के लिए होने चाहिए ये इंतजाम
अस्पताल में फायर उपकरण लगे होने चाहिए। स्मोक डिटेक्टर (फायर अलार्म) पानी के लिए टू वे प्वाइंट, रैंप लगा होना चाहिए। अस्पताल में पानी का टैंक व स्प्रिंकलर लगा होना चाहिए। अस्पताल तक फायर वाहन पहुंचाने की जगह होनी चाहिए। कम से कम दो गेट होने चाहिए।
कई बार आग की घटनाओं से बचाव के लिए मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इनमें कुछ निजी अस्पतालों ने मानकों को पूरा कर फायर एनओसी ली है, लेकिन किसी भी सरकारी अस्पताल के पास फायर एनओसी नहीं है।
जिला अस्पताल में फायर एनओसी की जिम्मेदारी सीएमएस की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फायर एनओसी के लिए मानक पूरे किए जा रहे हैं।