Rampur News: जागरूकता के अभाव में कबाड़ हो रहे प्लास्टिक बैंक
रामपुर। ग्राम पंचायतों को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त किए जाने के मकसद से गांव-गांव प्लास्टिक बैंक स्थापित किए गए। जिससे कि गांव की प्लास्टिक को इनमें एकत्र किया जा सके। जागरूकता के अभाव और जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते ग्राम पंचायतों में स्थापित प्लास्टिक बैंक का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। प्लास्टिक बैंक अब कबाड़ हो रहे हैं।
जिले में पहले चरण में 36 ग्राम पंचायतों के 42 गांवों को ओडीएफ प्लस घोषित किया जा चुका है। इन गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत अनेक कार्य कराए गए हैं। इन्हीं में से एक है गांव में प्लास्टिक का एकत्रीकरण। इसके लिए इन गांवों में 400 से अधिक लोहे के जालीनुमा प्लास्टिक बैंक लगाए गए थे। इनको गांव में चौराहे, मुख्य मार्ग और सार्वजनिक स्थानों पर लगाकर ग्रामीणों को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान बताए। साथ ही प्लास्टिक की बोतल, डिब्बे और अन्य वस्तुओं को इस बैंक में डालने के लिए जागरूक किया गया था। जिससे प्लास्टिक पर्यावरण के लिए खतरा न बने।
अब स्थिति यह है कि गांवों में इन प्लास्टिक बैंक में नाम मात्र की प्लास्टिक जमा है। प्लास्टिक बैंक जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। कहीं-कहीं पर तो इनका नामो-निशान तक मिट चुका है। लोगों को इन प्लास्टिक बैंक के उपयोग के बारे में भी नहीं पता है। जागरूकता के अभाव में इन प्लास्टिक बैंक का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। इस वजह से गांवों में अभी भी लोग प्लास्टिक को कूड़ेदान या सड़कों पर फेंक रहे हैं।
नहीं होती प्लास्टिक बैंक की सफाई
प्लास्टिक बैंक में एकत्र होने वाली प्लास्टिक को रोजाना सफाईकर्मी को एकत्र करना था, जिसके बाद प्लास्टिक का निस्तारण किया जाना था, लेकिन सफाईकर्मी को प्लास्टिक बैंक की नियमित सफाई करने नहीं पहुंचते। इसके चलते जो प्लास्टिक उसमें डाली जाती है वह वहीं पड़ी रहती।
ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक बैंक लगे हुए हैं। ग्रामीणों को प्लास्टिक की चीजों को इनमें डालने के लिए कहा गया है। जिन ग्राम पंचायतों में इनका सदुपयोग नहीं हो रहा है। वहां के लोगों को जागरूक किया जाएगा।