रामपुर

Rampur News: भटक कर आबादी क्षेत्र में आ रहे तेंदुए

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रामपुर। उत्तराखंड की सीमा से सटे होने के कारण रामपुर में तेंदुए बड़ी आसानी से दाखिल हो जाते हैं। जिले में स्वार और बिलासपुर में वन क्षेत्र हैं, वहां से भटक कर तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों में आ जाते हैं। बीते तीन सप्ताह में पांच बार तेंदुआ देखा जा चुका है। बिलासपुर में तो तेंदुए के साथ दो शावक भी देेखे गए। वन विभाग की टीम ने पिंजरा भी लगाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बिलासपुर में 1633 हेक्टेयर और स्वार में 2800 हेक्टेयर वन क्षेत्र हैं। उत्तराखंड की सीमा से सटा होने के चलते रामपुर में तेंदुए की दहशत बनी रहती है। कभी वन क्षेत्र में तो कभी आबादी वाले क्षेत्र में तेंदुए देखे जा रहे हैं। रामपुर में पनवड़िया, शाहबाद रोड आदि इलाकों में तेंदुए देखे गए। वहीं बिलासपुर में तेंदुआ के साथ शावकों को भी देखा गया। हालांकि, वन विभाग को अभी तक तेंदुआ पकड़ने में सफलता नहीं मिल पाई है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्वार क्षेत्र की सीमा से तेंदुओं को पर्याप्त मात्रा में भोजन मिल जाता है। इसलिए यह रामनगर से खादर क्षेत्र में पड़ने वाली नदी को पार कर स्वार क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। 20-25 किलोमीटर के इस क्षेत्र के बीच भोजन मिलने के कारण ही यह आबादी वाले क्षेत्र में दाखिल हो रहे हैं। उत्तराखंड के हल्द्वानी से कोसी नदी गुजरती है जो कि रामनगर के खादर क्षेत्र से होकर निकलती है, रामपुर से जुड़ा हुआ है। इस नदी के आसपास क्षेत्र में ही घास उगी हुई है, इसलिए यहां नील गाय, खरगोश, जंगली सुअर आदि काफी अधिक हैं। इसके चलते तेंदुआ भोजन की तलाश में आते हैं और यहीं से रास्ता भटकने पर आबादी क्षेत्र में पहुंच जाते हैं।

बीते दिनों इन इलाकों में देखे गए तेंदुए

बिलासपुर क्षेत्र के नबावगंज में 20 दिन पहले भाखड़ा डैम के पास तेंदुआ दिखा था। किसानों के शोर मचाने पर तेंदुआ गन्ने के खेत में घुस गया। वन विभाग ने पिंजरा लगाया, लेकिन तेंदुआ नहीं फंसा।

बिलासपुर में 15 दिन पहले चंदेन गांव के पास रोड से तेंदुआ एक कुत्ते को उठा ले गया था। बाद में ग्रामीणों ने तेंदुआ के साथ वहीं पर दो शावकों को भी देखा। सूचना पर वन विभाग की टीम ने कांबिंग की और पिंजरा भी लगाया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

10 दिन पहले रामपुर में बिजली विभाग की वर्कशाप में तेंदुआ देखा गया था। ग्रामीणों ने तेंदुआ को निकलते हुए देखकर वन विभाग को सूचना दी थी। टीम के कांबिंग के बाद भी नहीं मिल सका था।

सप्ताह भर पहले सैदनगर में जौहर यूनिवर्सिटी के पीछे तेंदुआ देखा गया था। जिस पर राहगीरों ने वन विभाग को सूचना भी दी थी, लेकिन टीम ने आकर कांबिंग की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका।

बिलासपुर में उत्तराखंड की सीमा से सटे मनिहार खेड़ा में दो सितंबर की सुबह तेंदुआ ने कुत्ते पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने शोर मचाया तो तेंदुआ घायल कुत्ते को छोड़कर जंगल में भाग गया था। सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने कांबिंग की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

पांच साल में पांच तेंदुए पकड़े

वन विभाग के अनुसार बीते पांच साल में जिले में वन विभाग की टीम ने पांच तेंदुए पकड़े हैं। सबसे ज्यादा तेंदुए स्वार क्षेत्र में पकड़े गए हैं। अभी भी जहां से तेंदुआ दिखने की सूचना मिलती है, वहां पिंजरा लगाया जाता है।

वर्जन :
उत्तराखंड की सीमा से सटे होने के कारण यहां तेंदुए आसानी से आ जाते हैं। खादर क्षेत्र में भोजन की तलाश में आने वाले तेंदुए भटककर आबादी में पहुंच जाते हैं। वन विभाग की टीम लगातार कांबिंग कर तेंदुआ पकड़ने के प्रयास में रहती है। जहां से तेंदुआ दिखने की सूचना मिलती है, टीम तुरंत मौके पर जाती है। – राजीव कुमार, डीएफओ, वन विभाग


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