Rampur News: इमाम हुसैन की याद में मनाया जाता है मोहर्रम का महीना
रामपुर। मोहर्रम की दस तारीख को नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन इस्लाम की खातिर शहीद हो गए थे। मोहर्रम का पूरा महीना उनकी याद के तौर पर मनाया जाता है। मोहर्रम की दस और ग्यारह तारीख को रोजा रखना बहुत बड़ा सवाब है। मोहर्रम का महीना इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है। यह महीना शिया और सुन्नी मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों के लिए बहुत ज़रूरी होता है। इस महीने की दस तारीख को योमे आशुरा कहा जाता है। मुफ्ती मोहम्मद वसीम रजा खान बताते हैं कि मोहर्रम उल हराम का महीना नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 जानिसार साथियों की इस्लाम के लिए दी जाने वाली कुर्बानियों की याद ताजा करता है। हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने हक व सदाकत और दीने इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी जानों का नजराना पेश करके, वो तारीख लिख दी है। जो यजीदीयत के खिलाफ लड़ने वालों को कयामत तक हौसला देती रहेगी। आ
मुफ्ती ने बताया कि इमाम हुसैन ने अपना सिर देकर जमाने को यह पैगाम दे दिया कि कभी भी जुल्म के आगे सिर न झुकाना। यही वजह है के आज हर मजहब के मानने वाले कर्बला में हक व बातिल के दरमियान लड़ी जाने वाली जंग की मिसाल देते हैं। माहे मोहर्रम में खुराफात और गलत रस्मों से बचकर हजरत इमाम हुसैन और शहीदाने-ए-कर्बला की याद में महफिले सजाएं। नमाज की पाबंदी करें, नजरों नियाज का इंतजाम करें, सबील लगाकर लोगों को पानी और शरबत वगैरह पिलाएं। मिस्कीन और गरीबों पर सदका व खेरात करें। आगे कहा कि अगर अल्लाह तौफीक दे तो, मोहर्रम की नौ, दस और 11 तारीख को रोजा रखें।