रामपुर

Rampur News: मच्छरों पर वार के लिए नहीं हैं हथियार

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रामपुर। बुखार के बढ़ते प्रकोप के बीच मच्छरों पर वार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास हथियार ही नहीं हैं। एंटी लार्वा के छिड़काव के लिए विभाग को हर रोज पांच लीटर केरोसिन की जरूरत है, जिसकी कमी एक माह से जिले में बनी हुई है। शासन से इसके लिए बजट नहीं मिला है। दूसरी ओर मच्छरों से बचाव में लोगों को दी जाने वाली मच्छरदानी भी विभाग को तीन साल से नहीं मिली हैं। ऐसे में सिर्फ कागजी आंकड़े दुरुस्त कर मच्छरों से लड़ाई लड़ी जा रही है।

जिले में बुखार पीड़ितों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है। बुखार के साथ टायफाइड, डेंगू व मलेरिया के मामले निकल रहे हैं। बुखार की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य टीमें कैंप लगाकर लोगों को दवाएं बांट रही हैं। शनिवार को शहर में तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई। इनमें चाह इच्छा राम, नूर महल और आवास विकास क्षेत्र में एक-एक व्यक्ति की रिपोर्ट डेंगू पॉजीटिव आई है। डेंगू-मलेरिया रोकथाम के लिए स्वास्थ्य टीमें दौड़ जरूर रही हैं, लेकिन उन्हें संसाधनों की कमी से जूझना पड़ रहा है।

दरअसल, मच्छरों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास केमिकल की कमी है। मच्छरों को खत्म करने के लिए एंटी लार्वा कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है। इनमें केमिकलाें में केरोसिन मिलाया जाता है। जुलाई में केरोसिन खत्म हो चुका है। इसके बाद से व्यवस्था रामभरोसे चल रही है। वहीं फॉगिंग के लिए डीजल का बजट भी शासन ने नहीं दिया है। ग्राम पंचायतें और निकाय अपने खातों से पैसा खर्च कर डीजल ले रही हैं। फॉगिंग कराकर मच्छरों से जंग लड़ी जा रही है।

हर साल रहता है केरोसिन का संकट

केरोसिन की पूर्ति की जिम्मेदारी पूर्ति विभाग के पास है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से सरकार ने राशन की दुकानों पर केरोसिन देना बंद कर दिया है। इसलिए पूर्ति विभाग ने केरोसिन देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। पिछले वर्ष भी स्वास्थ्य विभाग को केरोसिन नहीं मिल पाया तो शासन से बजट की मांग की गई थी। बजट मिलने पर बरेली से 400 लीटर केरोसिन मंगाया था। इस बार अब तक केरोसिन नहीं मिला है।

ऐेसे बनता है मिश्रण

एक लीटर मैलॉथियान में 19 लीटर डीजल मिलाकर फॉगिंग कराई जाती है। वहीं एक लीटर पॉयराथिन और 19 लीटर केरोसिन मिलाकर एंटी लार्वा कीटनाशक तैयार किया जाता है। इसका छिड़काव कूलर, फ्रिज की ट्रे, टायर, गमलों, जलभराव वाले स्थानों पर किया जाता है। जिससे कि मच्छर पैदा करने वाले लार्वा को नष्ट किया जा सके।

-आखिरी बार मिली थीं डेढ़ लाख मच्छरदानी

तीन साल पहले जिले के स्वास्थ्य विभाग को डेढ़ लाख मच्छरदानी बांटने के लिए मिली थीं। बीते सालों में इनका वितरण किया जा चुका है। कुछ मच्छरदानी सरकारी अस्पतालों में बेडों पर लगाईं। कुछ का गांव-देहात में लोगों में वितरण हुआ। इस साल विभाग के पास कोई मच्छरदानी नहीं है। इसकी मांग शासन को भेजी गई है।

विभाग के पास केमिकल

-मैलाथियॉन-200 लीटर

-पॉयराथिन-80 लीटर

-केरोसिन-00

-डीजल- 00

अब तक डेंगू-मलेरिया के मामले

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 3500 लोगों की डेंगू की जांच की जा चुकी है, जिसमें 23 लोग डेंगू पीड़ित मिले हैं। अभी तक डेंगू से किसी की जान नहीं गई है। वहीं 14833 लोगों की मलेरिया जांच हुई, जिसमें 23 मरीज मिले हैं। मलेरिया से भी किसी की जान नहीं गई है।


डेंगू व मलेरिया की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में बुखार पीड़ित मरीजों को मच्छरदानी युक्त वार्ड में ही भर्ती किया जा रहा है। गांवों में बांटने के लिए मच्छरदानी आती हैं तो गांवों में उनका वितरण होगा। डीजल व केरोसिन की मांग के लिए बजट की मांग शासन को भेजी गई है।

– डॉ. केके चहल, जिला मलेरिया अधिकारी रामपुर।


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