Rampur News: परिषदीय स्कूलों के बच्चों की थाली में नहीं, सरकारी व्यवस्था में मिले कीड़े
रामपुर। दढि़याल और मसवासी के छह विद्यालयों में बच्चों के खाने में कीड़ मिले हैं। एक शिक्षक ने शिक्षा विभाग के ग्रुप पर जब इसकी जानकारी दी तो अधिकारियों के कान खड़े हो गए। बच्चों की थाली में परोसे गए भोजन को आनन-फानन फेंकवाया गया। छह विद्यालयों के करीब 1200 बच्चे निवाला चखने वाले थे। उस समय जो अभिभावक बच्चों के स्कूल आए थे, उन्होंने भी शिक्षकों को खरीखोटी सुनाई। इसके बाद एनजीओ से भी इस संबंध में जानकारी ली गई। शिक्षा विभाग मामले की जांच कर रहा है।
मंगलवार की सुबह करीब 12 बजे के आसपास दढि़याल और मसवासी में प्राइमरी और कंपोजिट विद्यालयों में बच्चों को भोजन परोसा गया। थाली में भोजन परोसने के बाद जब कंपोजिट विद्यालय दढियाल के शिक्षक जितेंद्र त्यागी भोजन को चेक करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने देखा कि भोजन में परोसे गए चावल में कीड़े (सूड़ियां) हैं और बच्चे इसको खाने जा रहे थे। सभी बच्चों को भोजन खाने से रोक दिया गया। इसके बाद शिक्षक हितेंद्र त्यागी ने तत्काल इसकी सूचना शिक्षा विभाग के ग्रुप पर दी। इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और सभी जगह मैसेज कर खाना रुकवा दिया। बच्चों के आगे से थाली हटवा कर भोजन फेंकवा दिया गया। इस बीच वहां पर कुछ अभिभावक भी आ गए थे और बच्चों को लेकर चले गए। इसके बाद करीब 1200 बच्चे भूखे घर चले गए। कंपोजिट विद्यालय दढि़याल के प्राधानाध्यापक जितेंद्र त्यागी ने बताया कि बच्चे बीमार न पड़ जाएं, इसलिए चावल डस्टबिन में डलवा दिए गए। बताया कि उच्च अधिकारियों को प्रकरण से अवगत करा दिया गया है।
इतने हैं पढ़ने वाले बच्चे
नगर पंचायत मसवासी के तीन परिषदीय विद्यालयों में लगभग साढ़े पांच सौ बच्चे नामांकित हैं, जिसमें सत्तर प्रतिशत बच्चे आमतौर पर प्रत्येक दिन उपस्थित रहते हैं। इंचार्ज अध्यापक नंद किशोर ने बताया कि बच्चों ने जब चावल में कीड़े मिलने की बात बताई तो चावल डस्टबिन में फेंकवाने पड़े, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य को क्षति न पहुंच सके।
बहुत से बच्चों ने घर जाकर किया भोजन
विद्यालय में जब बच्चों ने भोजन नहीं किया तब जहां अधिकतर बच्चे भूखे रह गए, वहीं बहुत से बच्चे ऐसे भी थे जो दोपहर का भोजन करने के लिए घर चले गए। बच्चों से जब माता-पिता ने कारण पूछा तब पता चला कि मंगलवार के दिन एनजीओ ने जो दाल-चावल भेजा था, उसमें कीड़े थे। यह बात सुनकर अभिभावक भी अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित हो गए।
25 दिन में आठ 15 दिन ही एनजीओ ने भेजा है मिडडे मील
नगरीय विद्यालयों की मिडडे मील व्यवस्था बेहद लचर है। नगर पंचायत नरपतनगर, दढि़याल, मसवासी, नगर पालिका परिषद टांडा और नगर पालिका परिषद स्वार में लगभग 25 परिषदीय विद्यालय हैं, जहां लगभग तीन हजार से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें अधिकतर बच्चे निर्धन वर्ग से हैं। संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों द्वारा विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है कि तीन जुलाई से स्कूल खुलने के बाद आज 25 जुलाई तक मुश्किल से आठ दिन ही एनजीओ द्वारा भोजन भेजा गया है। कई बार कम भोजन मिलने के कारण बहुत से बच्चे भूखे रह गए। कई विद्यालयों में तो भोजन पहुंचा ही नहीं।
यह है साप्ताहिक मिडडे मील मीनू
प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को भोजन का साप्ताहिक मीनू जारी किया हुआ है। इसके अंतर्गत
सोमवार: सब्जी-रोटी और मौसमी फल,
मंगलवार:दाल-चावल,
बुधवार: तहरी व दूध,
बृहस्पतिवार: दाल-रोटी
शुक्रवार: तहरी और शनिवार: सब्जी-चावल
नहीं मिलता मीनू के अनुसार भोजन
नगरीय विद्यालयों के बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मीनू के मुताबिक कभी भी भोजन नहीं मिलता। ऊपर से जो भी भोजन परोसा जाता है, वह मानक के अनुसार नहीं होता। फलों के नाम पर एक केला, दूध में पानी की मात्रा और रोटी तो कभी कभार ही मिलता है। शिक्षकों का कहना है कि रोटी ठंडी मिलती है, जिसे बच्चे चबा भी नहीं पाते हैं।
मंगलवार को दढ़ियाल के स्कूलों में वितरित किए जाने वाले एमडीएम के खाने में कीड़े मिलने का मामला संज्ञान में नहीं है, लेकिन एनजीओ द्वारा वितरित किए जाने वाले खाने की गुणवत्ता सही नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं, जिसके संबंध में उन्होंने बीएसए को रिपोर्ट दी है। यदि एनजीओ खाने की गुणवत्ता में सुधार नहीं करता है तो उसको हटाया जाएगा।
-विजय कुमार बीईओ स्वार
मिड-डे-मील का खाना खराब होने की शिकायत संज्ञान में आई है। इसके लिए मैंने संबंधित ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी को जांच करने के लिए कहा है। जांच बाद कार्रवाई होगी।
-संजीव कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपुर।
मसवासी और दढि़याल के एनजीओ में लगातार शिकायतें आ रही हैं। भोजन में कीड़े निकल रहे हैं। अब इनका एनजीओ का रजिस्ट्रेशन रद्द करवाया जाएगा।
-नंदकिशोर कलाल, सीडीओ