ब्याज वृद्धि को लेकर नहीं है आरबीआई एमपीसी की एक राय, कुछ सदस्य अब रेटिंग वृद्धि के हक में नहीं
आरबीआई एमपीसी मीटिंग मिनट्स: आरबीआई की सांख्यिकी समिति ने अप्रैल और जून में हुई समिति की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव का निर्णय नहीं लिया गया। लेकिन छह मराठासी समिति के सदस्यों के बीच आने वाले समय में रेटिंग रेटिंग्स में ग्रुप को लेकर राय बंटती नजर आ रही है। आरबीआई ने 6-8 जून तक जारी की गई सूची समिति की बैठक के जो मिनट जारी किए हैं उनमें यह पता लगता है।
8 जून को आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जब काउंसिल रेट्स को बंद कर दिया था तो उन्होंने नीचे दिए गए संकेत दिए थे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लिए रिजर्व बैंक के एक मॉनिटरी रिजर्वेशन को आगे भी जारी किया जाना चाहिए। लेकिन एमपीसी कमेटी के विदेश सदस्य जयंत वर्मा ने जो पहले भी महाराष्ट्र रेपो रेट को लेकर सवाल पूछे थे, उन्होंने इस बार एमपीसी कमेटी की बैठक में अपने रिपब्लिकन में कहा कि एमपीसी कमेटी के बाहरी सदस्य का जो रुख है वह वो सांख्यिकी से परे है। उन्होंने कहा कि खतरनाक परत के नज़दीक जाने पर वे उद्योग को अंतिम क्षति पहुँच सकती है।
सांख्यिकी समिति की दूसरी सदस्य आशिमा गोयल ने अपने दस्तावेज़ में लिखा है कि उम्मीद है कि सूची कम होगी। लेकिन ये दावा है कि अनुपात में बहुमत न हो। उन्होंने कहा कि रिपो रेट को लंबे समय तक बनाए रखने की कोई जरूरत नहीं है, जिससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचे।
हालाँकि आरबीआई के अपने पार्ट का एमपीसी की बैठक में रुचि को लेकर कुछ और था। इनका मतलब यह है कि आरबीआई का फोकस पोर्टफोलियो से पैदा होने वाला है। इन लोगों का मानना है कि रेपो दर में बढ़ोतरी पर रोक केवल समान मंजूरी बैठक भर है। और भविष्य में मैकेनिकल डेटा के आधार पर रेटिंग रेटिंग पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि एसोसिएशन को टोलरेंस बैंड के अंदर लाया जा सकता है लेकिन अभी तक इस दिशा में आधा ही काम हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारे विरुद्ध युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है। शक्तिकांत दास ने कहा कि ब्याज के चक्र के बारे में भविष्य में कोई भी दिशा-निर्देश देना संभव नहीं है।
म्युनिसिपल एमपीसी की बैठक के बाद मई महीने के लिए जो खुदरा बिक्री दर के आंकड़े घोषित किए गए हैं, उनमें समितियां दार समितियां 4.25 फीसदी पर हैं। लेकिन डील में देरी चिंता को बढ़ाने का काम कर रही है।
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