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दिल-आफजा की वजह से ट्रेंड में है रूह-आफजा, जानें क्‍या है पूरा मामला

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<पी शैली ="टेक्स्ट-एलाइन: जस्टिफ़ाई करें;">साल 1907 से शरबत बनाने वाली कंपनी रूह-अफजा इन दिनों काफी चर्चा में है। यह चर्चा नाम से मिलता है— इन दोनों के बीच का मामला सुप्रीम कोर्ट ने भी भेजा था, जिसे लेकर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दिल आफजा को शरबत बनाने से रोक दिया है। 

करीब 117 साल पुरानी रूह-अफजा शरबत बनाने वाली कंपनी अपने शरबत कारोबार को देश के ज्यादातर जगहों पर सप्लाई करती है। इसकी आपूर्ति विदेशों में भी होती है। हालांकि 2020 में इसी के नाम से मतलब अलग-अलग लैबोरेट्रीज कंपनी ने दिल आफजा शरबत का बिजनेस शुरू किया, लेकिन इस पर रूह आफजा कंपनी ने आपत्तिजनक दर्ज किया था। 

लेबरट्रीज़ कंपनी के दावों पर मुबारक 

साल 2020 में लैब रेट्रीज कंपनी ने कहा था कि वह 1976 से दिल आफजा नाम से दवा बना रहा है, जिस कारण उसने इसी नाम से शरबत बनाना शुरू किया है और उसे बनाने से रोक नहीं सकता है। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसे बनाने और बेचने की अनुमति दे दी थी। इसके बाद हमदर्द नेशनल फाउंडेशन ने इसके खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट डिवीजन बेंच में अपील की. 

दिल आफजा शरबत बेचने पर रोक 

दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने इस पर पिछले साल फैसला सुनाते हुए कहा कि रूह आफजा एक प्रतिष्ठित ब्रांड है और इसका अनुपालन नाम से शरबत छत नहीं जा सकता है। उसी तरह का उत्पाद बिक्री ट्रेडमार्क से जुड़े संदेश का उल्लंघन माना जाएगा। हाई कोर्ट ने इस शरबत को बेचने पर रोक लगा दिया था। 

सुप्रीम कोर्ट ने भी रोका 

हाईकोर्ट की बेंच डिवीजन के जजमेंट के खिलाफ लैबोरेट्रीज सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इसी पर आज सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जे बी पारडीवाला की बेंच ने सुनाया है और हाई कोर्ट डिवीजन के फैसले को बरकरार रखा है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ये ट्रेडमार्क से जुड़े संदेश का उल्लंघन है। 

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