Shahjahanpur News: उम्र पूरी कर चुके 10 हजार वाहन, फाइलों में कैद हो गया स्क्रैप सेंटर
शाहजहांपुर। पुराने वाहन हाेने की वजह से सड़क हादसों और प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने स्क्रैप नीति को लागू किया लेकिन उस पर अमल शुरू नहीं हो सका है। जिले में करीब 10 हजार से अधिक वाहन उम्र पूरी कर चुके हैं। वाहनों को बेचने के लिए बनाया जाने वाला स्क्रैप सेंटर फाइलों में अटक गया है। ऐसे में लोगों को अपने वाहन कबाड़ियों के पास बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
एक अप्रैल से स्क्रैप पॉलिसी को लागू किया गया था। इसके तहत प्रत्येक जिले में स्क्रैप सेंटर खोलकर वाहन मालिकों को लाभ देने का उद्देश्य था। नियम के तहत, पुराना वाहन बेचकर नया वाहन खरीदने पर रजिस्ट्रेशन में लगने वाले टैक्स में छूट मिलनी थी। आठ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिले में स्क्रैप सेंटर नहीं खुल सका है। जिले के बड़े कारोबारी जगजीत सिंह माटा ने स्क्रैप सेंटर बनाने की इच्छा जाहिर करते हुए आवेदन किया था, पर अभी तक उस पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी हैं। सेंटर नहीं होने के चलते पुराने वाहन कबाड़ियाें को बेचने को मजबूर हैं। उन्हें योजना के तहत मिलने वाला लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। परिवहन निगम के अधिकारियों के अनुसार, जिले में करीब 10 हजार वाहन 15 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं। ए से जे सीरीज तक सारे वाहन 15 वर्ष की आयु पार कर रहे हैं।
120 सरकारी वाहन किए गए थे चिह्नित : स्कैप योजना लागू होने के बाद जिले के 120 सरकारी वाहन कबाड़ के रूप में चिह्नित किए गए थे। इसमें कुछ की आरसी ही निरस्त हो चुकी है। योजना में सिर्फ सरकारी वाहन को स्क्रैप सेंटर पर बेच सकते हैं। शेष वाहन को कटवाकर चेचिस नंबर एआरटीओ कार्यालय में जमा कर विभाग से होने वाली कार्रवाई से बच सकते हैं।
थानों में खड़े कबाड़ वाहन के लिए मालखाना नहीं हो सका पूर्ण : जिले के 23 थानों का काफी हिस्सा कबाड़ हो चुके वाहनों ने घेर रखा है। कांट थाने में बड़े पैमाने पर वाहन सड़ रहे हैं। चार पहिया से लेकर बाइकें तक अपनी नीलामी का इंतजार कर रही हैं। वाहनों के कलपुर्जे तक गल चुके हैं। थानों के वाहनों को खड़ा करने के लिए नगरिया मोड़ पर 24 बीघा जमीन पर मालखाना बनना था। उसकी चहारदीवारी बन गई, लेकिन लिंटर पड़ना बाकी रह गया है। कार्य पूर्ण नहीं होने के चलते थानों पर ही वाहन खड़े खराब हो रहे हैं।
-सरकारी वाहन 15 साल की उम्र पूरी करने पर स्क्रैप सेंटर पर बेचना जरूरी है। शेष वाहनों का पांच साल का रिन्यूवल कराया जा सकता है। स्क्रैप सेंटर का मामला मुख्यालय स्तर से लंबित है।
शांतिभूषण पांडेय, एआरटीओ