Shahjahanpur News: 15 सौ चिह्नित, पर सिर्फ 286 बाढ़ पीड़ितों को मिला मामूली मुआवजा

फसल नष्ट होने के बाद किसानों के खाली खेते में पशु चरते हुए। संवाद
शाहजहांपुर / मिर्जापुर। गंगा की बाढ़ में लगभग दो हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर लगी ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, तिल, मूंगफली, धान आदि की 90 और गन्ने की 80 फीसदी फसल नष्ट हो गई। इसके साथ ही ग्रामीणों के कच्चे-पक्के, छप्परदार मकान भी नष्ट हुए। सर्वे के बाद नुकसान होने पर करीब 15 सौ किसानों को चिह्नित किया गया। बावजूद इसके अब तक महज 286 किसानों को ही प्रशासन मुआवजा मुहैया करा सका है।
प्रशासन के मुताबिक कलान और जलालाबाद तहसीलों में ही बाढ़ से फसलों और संपत्ति के नुकसान का सर्वे हुआ है। सर्वे में दोनों तहसीलोंं में डेढ़ हजार लोगों को चिह्नित किया गया। जिसमें अब तक फसल नुकसान होने पर 235 किसानों को 5.96 लाख रुपये तो संपत्ति नुकसान में अब तक 51 लोगों को 2.04 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है। बाकी लोगों को मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
यहां बता दें कि फसल नुकसान में दो से तीन हजार रुपये तो संपत्ति नुकसान में अधिकतम चार से पांच हजार रुपये मुआवजा दिया गया है। नुकसान का आकलन किस आधार पर किया गया, यह कोई अधिकारी और कर्मचारी बताने को तैयार नहीं है।
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ग्रामीणों के मुताबिक फर्जी किया गया सर्वे
बाढ़ की स्थिति गंभीर होने पर 28 अगस्त को यहां आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नष्ट हुए घरों और फसलों का सर्वे कराकर जल्द से जल्द मुआवजा बांटने के आदेश दिए थे। किसानों का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश पर नुकसान का राजस्व विभाग ने बिना देखे सर्वे कर मनमानी रिपोर्ट शासन को भेज दी। इससे किसानों को बाढ़ में नष्ट हुई फसलों और टूटे घरों का फिलहाल कोई खास मुआवजा नहीं मिला है।
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किसानों ने बयां किया दर्द
105 बीघा कृषि भूमि है। इसपर गन्ना, धान, ज्वार, बाजरा, उर्द, तिल, मूंगफली आदि की उगाई गई फसल बाढ़ में डूबकर नष्ट हो गई। लेखपाल खेत के कागजात ले गए हैं, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला है। रबी बुआई के लिए समस्या आ रही है।
– शिवकुमार सिंह, कटैला नगला
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चार भाइयों ने 70 बीघा कृषि भूमि पर गन्ना, मूंगफली, धान और उर्द तिल की फसल की थी। बाढ़ में सभी फसल नष्ट हो गई। फसल नुकसान का सर्वे नहीं किया गया। लेखपाल ने बताया कि ग्राम पंचायत चकबंदी बंदोबस्त में है। गांव की खतौनी भी नदराद है। ऐसे में मुआवजा नहीं मिला है।
– संतोष सिंह, भरतपुर
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50 बीघा कृषि भूमि पर गन्ने की पेड़ी बची है। शेष सभी फसल को बाढ़ ने निगल लिया। कोई सर्वे नहीं कराया गया। पूरी ग्राम पंचायत की खतौनी लेखपाल गायब बता रहे हैं। ऐसे में फसल नुकसान की भरपाई होना मुश्किल लग रहा है।
– विनय कुमार सिंह, भरतपुर
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बाढ़ में सभी फसल नष्ट हो गई। कोई नुकसान देखने नहीं आया। अब गेहूं की बुआई, जुताई, बीज, खाद की व्यवस्था में दिक्कत आ रही है। सभी लोग मजदूरी भी नहीं कर सकते। इससे बाढ़ पीड़ितों के सामने बहुत परेशानी है।
– दयाराम, पैलानी उत्तर
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बाढ़ के दौरान मकान ढह जाने से एक माह तक ढाईगांव मे बनाए गए आश्रय स्थल में रहे थे। बाढ़ उतरने के बाद गांव लौटे। गांव में कोई भी बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे करने नहीं आया है।
– शौकीन, मस्जिद नगला
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लगभग 80 बीघा कृषि भूमि पर गन्ने की पेड़ी ही बची है। शेष सभी खरीफ फसलें बाढ़ में डूबकर नष्ट हो गईं। गांव में कोई फसल नुकसान का सर्वे करने नहीं आया। ऐसे में फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है।
– आदेश सिंह, बटन नगला
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मुआवजा वितरण की प्रक्रिया चल रही है। कुछ किसानों को मुआवजा मिल गया है। बाकी लोगों का डाटा फीडिंग का काम चल रहा है। जल्द ही अन्य लोगों को मुआवजा मिल जाएगा।
– डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व

फसल नष्ट होने के बाद किसानों के खाली खेते में पशु चरते हुए। संवाद

फसल नष्ट होने के बाद किसानों के खाली खेते में पशु चरते हुए। संवाद

फसल नष्ट होने के बाद किसानों के खाली खेते में पशु चरते हुए। संवाद

फसल नष्ट होने के बाद किसानों के खाली खेते में पशु चरते हुए। संवाद

फसल नष्ट होने के बाद किसानों के खाली खेते में पशु चरते हुए। संवाद

फसल नष्ट होने के बाद किसानों के खाली खेते में पशु चरते हुए। संवाद