शाहजहाँपुर

Shahjahanpur News: अपील बेअसर…पेट की खातिर अकेले जंगल जा रहे लोग

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Appeal ineffective...people going to the forest alone for the sake of food

जंगल किनारे फसल की रखवाली कर रहे गजराज। संवाद

खुटार। क्षेत्र के दर्जनभर गांवों में बाघ-बाघिन की दहशत फैली हुई है। वन और पुलिसकर्मी ग्रामीणों से अकेले जंगल नहीं जाने की अपील कर रहे हैं लेकिन पेट के खातिर यह अपील न मानकर ग्रामीण अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं। वन कर्मी लगातार कांबिंग का दावा कर रहे हैं लेकिन ये दावे भी हकीकत में बेअसर साबित हो रहे हैं।

जंगल किनारे बसे राठ, रायपुर पटियात, महुरैया, रसवां कलां, कुंभिया माफी, मुरादपुर, गुरघिया, नरौठा हंसराम, छापाबोझी, बुझिया, वनकटा सहित 12 से अधिक गांवों में बाघ और बाघिन की दहशत बनी हुई है। एक माह में छह से ज्यादा छुट्टा पशु उनका निवाला बन चुके हैं। शुक्रवार रात सीओ पंकज पंत ने पुलिस के साथ मशाल जलाकर दस गांवों का भ्रमण किया था। लोगों को समूह के रूप में चलने और खेतों में काम करने की अपील भी की। रेंजर का दावा है कि वनकर्मियों की टीमें बनाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा। किशोर और महिलाएं जंगल में बकरियां चराने पहुंच रहे हैं। लोग जलौनी लकड़ियों को जंगल से बिना रोकटोक के ला रहे हैं। इससे किसी भी दिन बड़ी घटना हो सकती है।

…बकरियन को पेटु कैसे दाबई

– गांव राठ से थोड़ी दूर पर खुटार रेंज का जंगल है। जंगल किनारे तीन महिलाएं बकरियां चरा रहीं थीं। बाघिन की दहशत को लेकर सवाल किया गया तो एक बुजुर्ग महिला बोल पड़ी कि भइया मजबूरी हई…अगर हमई भूख लगिही तउ पेटु दाबि लिहीं लेकिन इन बकरियन को पेटु कैसे दाबईं।

मजबूरी मा आलू रखाई रहे भईया

– जंगल से सटे खेत किनारे खेत में गांव राठ के गजराज आलू रखा रहे थे। बाघिन के बारे में जानकारी करने पर बताया कि बाघिन आए दिन देखी जाती है। बोले खेत सरदार जी को हैं, हम मजबूरी मा मजदूरी पर आलू रखाई रहे हई।

जलौनी लकड़ी उठाने के लिए जंगल जा रहे लोग

– बाघिन की दहशत होने और अधिकारियों की अपील का भी कोई असर नहीं दिख रहा है। लोग रोजाना की तरह जलाने के लिए जंगल में लकड़ी लेने जाते है। सोमवार को भी फत्तेपुर बीट में जंगल के अंदर लकड़ी काटते हुए मिले युवक का कहना था कि जलौनी लकड़ी लेने आए हैं।

जान पियारी हई लेकिन मजबूरी मा जाति हई जंगल

– गांव राठ के रामदीन जंगल से लकड़ियां बीनकर आते मिले। बाघ और बाघिन से खतरे की बात की तो बोले जान तउ बहुत पियारी हई, लेकिन मजबूरी मा जंगल लकड़िया लेन जाति हई। इनही लकड़ियन से घर मा रोटी बनति हई और तापन के काम मा भी आई जाती हई।

कब-कब हुई घटनाएं

22 दिसंबर : खुटार के मोहल्ला देवस्थान निवासी परसादी लाल की गाय को फत्तेपुर बीट में मारा।

23 दिसंबर : गांव नरौठा हंसराम में हैचरी के पास बाघ ने एक गाय को मार डाला और किसान पर हमला किया। 29 दिसंबर : गांव रायपुर में छुट्टा पशु को मार डाला।

31 दिसंबर : गांव राठ में सुबह छुट्टा पशु और शाम को गांव कुंभिया माफी के छोटेलाल की बकरी को मारा।

01 जनवरी : हैचरी के पास बाघ ने बछड़े को निवाला बना डाला।

01 जनवरी : गांव राठ में सांड को निवाला बनाया।

वन दरोगा नंदा बल्लभ पांडेय और संतोष गौड़ के नेतृत्व में भ्रमण के लिए दो टीमें बनाकर लगाई गई हैं। विभाग से अतिरिक्त सुरक्षाबल भी मांगा गया है, जिससे लोगों को जंगल जाने से रोका जा सके।

मनोज श्रीवास्तव वन क्षेत्राधिकारी खुटार रेंज

जंगल किनारे फसल की रखवाली कर रहे गजराज। संवाद

जंगल किनारे फसल की रखवाली कर रहे गजराज। संवाद


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