Shahjahanpur News: बुखार में आयुर्वेद दवाएं दे रहीं लाभ
शाहजहांपुर। शरीर में होने वाले नुकसान को देखते हुए मरीज आयुर्वेदिक दवाओं का रुख करने लगे हैं। यही कारण है कि पुराने जिला अस्पताल स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में प्रतिदिन 50 से अधिक बुखार के मरीज पहुंच रहे हैं। दवा खाकर मरीजों को एक सप्ताह या उससे भी कम समय में स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।
वायरल बुखार के साथ मलेरिया के मरीज 320 से अधिक सामने आ चुके हैं। इसी तरह डेंगू के 42 मरीज सरकारी आंकड़ों में दर्ज हैं। लगातार बढ़ते मरीजों के चलते राजकीय मेडिकल कॉलेज से लेकर पीएचसी-सीएचसी में काफी भीड़ उमड़ने से दवा तक मिलना मुश्किल हो रहा। वहीं अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं। यही कारण है कि लोग आयुर्वेदिक दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं।
सीएमओ कार्यालय के सामने स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में पिछले दो माह से प्रतिदिन 150 से अधिक मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें 50 से अधिक मरीज बुखार, खांसी, जुकाम से पीड़ित पहुंच रहे हैं। कई मरीज लंबे समय से एलोपैथिक दवा खाने के बाद सही न होने पर आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्हें गिलोय, रासनापत्र चूर्ण, संजीवनी बटी आदि से राहत मिली है।
अस्पताल के डॉ. जगपाल राना ने बताया कि मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। बुखार की वजह से मरीज काफी ज्यादा परेशान हैं। आयुर्वेदिक से उन्हें आराम भी मिल रही है।
काढ़ा या जूस बनाकर पीने से बढ़ेंगी प्लेट्सलेट्स
डेंगू की चपेट में आने के बाद काफी तेजी के साथ प्लेट्सलेट्स गिरती होती हैं। इन्हें बढ़ाने में देसी नुस्खे भी काम आते हैं। डॉ. अवधेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि अनार का जूस और पपीते के पत्ते, गिलोय, थोड़ी अदरक और तुलसी के आठ से नौ पत्ते डालकर काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पीने से प्लेट्सलेट्स तेजी से बढ़ती हैं।
गिलोय का सेवन अधिक करने से होता नुकसान
डॉ. अवधेश मणि त्रिपाठी बताते हैं कि बुखार आने पर लोग गिलोय में काली मिर्च डालकर पीने लगते हैं। बिना चिकित्सक की सलाह से अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर को कई नुकसान भी हो सकते हैं। शरीर में गर्मी भी पैदा हो सकती है।